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चिंतन: भारत का दुनिया को मजबूत देश का संदेश

पीएन ने अचानक लाहौर पहुंच कर और पाक पीएम नवाज शरीफ की नवासी की शादी में शिरकत कर कूटनीति का मास्टर स्ट्रोक खेला था।

चिंतन: भारत का दुनिया को मजबूत देश का संदेश
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इसमें कोई दोराय नहीं कि अपने दो साल के छोटे से कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया में भारत को एक मजबूत देश के रूप में स्थापित करने की पूरी कोशिश की है। मनमोहन सरकार के समय पॉलिसी पैरालिसिस, तुष्टीकरण और नीति में स्पष्टता नहीं होने की वजह से भारत की छवि सॉफ्ट स्टेट की बन गई थी। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में कहते हैं कि 'अब भारत कोने में खड़ा एक देश नहीं है', तो इसका व्यापक ग्लोबल संदेश जाता है। मोदी सात जून को यूएस जाएंगे और वहां अमेरिकी कांग्रेस के साझा सत्रों को संबोधित करेंगे।

इस संबोधन के बहाने मोदी को दुनिया को अपनी सरकार के दो साल की उपलब्धियों को भी बताने का मौका मिलेगा। वे संदेश देना चाहेंगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और भारत दुनिया की हर चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। ऐसे में इस यात्रा से पहले पीएम ने यूएस मीडिया के सामने भारत की नीतिगत दृढ़ता को जिस स्पष्टता से रखा है, उससे देश की साख और मजबूत ही होगी। 'आतंकवाद से कोई समझौता नहीं' की बात कह मोदी ने अमेरिका की 'पाकिस्तान नीति' पर भी परोक्ष रूप से करारा चोट किया है।

डा. मनमोहन सिंह सरकार के समय आतंकवाद पर भारत की नीति उतना स्पष्ट नहीं था, जितना आज मोदी सरकार के समय है। उस समय पड़ोसी देशों से भी हमारे संबंध मधुर नहीं रहे थे। लेकिन मोदी ने अपने शपथग्रहण समारोह में सभी सार्क देशों को आमंत्रित कर पड़ोसी से अच्छे संबंध रखने की अपनी सोच स्पष्ट कर दी थी। पाकिस्तान से संबंध सुधारने के लिए भी मोदी ने 'बियोन्ड द पार' कोशिश की।

पीएन ने अचानक लाहौर पहुंच कर और पाक पीएम नवाज शरीफ की नवासी की शादी में शिरकत कर कूटनीति का मास्टर स्ट्रोक खेला था। उनकी यह कोशिश पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के लिए ही थी, लेकिन पाकिस्तान के आतंकी समूहों ने पठानकोट का जख्म देकर मोदी के प्रयासों को डिरेल कर दिया। अच्छे संबंधों की मंशा के बावजूद मोदी ने पाकिस्तान को सभी ग्लोबल मंचों पर आतंकवाद को लेकर बेनकाब किया है। इस दो साल में देखें तो विदेश नीति के मामले में अनुभव कम होने के बावजूद मोदी ने 32 से अधिक देशों की यात्रा कर चौंकाने वाले नतीजे दिखाए हैं।

घरेलू विकास को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने विदेश नीति का कुशलतापूर्वक दोहन किया है। विदेश सचिव एस. जयशंकर मोदी की लगातार हो रही विदेश यात्राओं की तुलना जापान के मशहूर नेता तोमोमी इवाकुरा के साथ करते हैं, जो अपने राज के शुरूआती दो सालों में उद्योगों, संस्थानों और सर्वर्शेष्ठ कार्यपद्धतियों के अध्ययन के लिए विदेश जाया करते थे और जिन्होंने 19वीं सदी में मेइजी की बहाली के बाद जापान के आधुनिकीकरण में उस ज्ञान का इस्तेमाल किया।

मोदी दुनिया भर के देशों में अनथक यात्राएं करके न सिर्फ देश की छवि को नई बुलंदी दी है, बल्कि बड़ी मेहनत से एक आकर्षक निवेश स्थल के रूप में भारत को स्थापित करने का काम भी कर रहे हैं। मोदी ने शुरू में ही मार्गरेट थैचर शैली वाले विशाल सुधारों को लागू नहीं किया है, बल्कि इसकी बजाय उन्होंने नीतिगत व धीरे-धीरे आर्थिक सुधार की नीति को अपनाया है। निश्चित ही आने वाले तीन सालों में मोदी बड़े सुधार भी करेंगे।

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