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सुनहरे भविष्य की ओर भारतीय हॉकी

एक दौर था जब किसी खेल में यदि भारत को जाना जाता था तो वह है हॉकी।

सुनहरे भविष्य की ओर भारतीय हॉकी

भारतीय हॉकी टीम जब ऑस्ट्रेलिया से चार मैचों की सीरीज का पहला मैच एकतरफा मुकाबले में हारी तो हॉकी प्रेमियों को अधिक आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि अकसर बड़ी टीमों से भारतीय टीम बड़े स्कोर के अंतर से हारती रही है। लेकिन बाकी के तीन मैचों में लगातार जीत दर्ज कर चार मैचों की सीरीज अपने नाम करना भारतीय हॉकी टीम की एक अलग ही कहानी बयान कर रहा है। विश्व चैंपियन आॅस्ट्रेलिया को उसी के घर में हराने को कई लोग चमत्कार की संज्ञा दे रहे हैं।

उनको यकीन नहीं हो रहा है कि यह वही भारतीय हॉकी टीम है जिसे विदेशी टीमें जब चाहें, जैसे चाहें, जहां चाहें वैसे हरा देती थीं। लेकिन यह जीत बताती है कि भारतीय हॉकी अब अपने बूरे दौर को पीछे छोड़ चुकी है। भारतीय हॉकी टीम कुछ समय पहले ही इंचियोन एशियाई खेलों में पाकिस्तान को हराकर स्वर्ण पदक जीती है। भारत को सोलह साल बाद वह कामयाबी मिली। उसी के साथ भारत ने 2016 में रियो-डी जनेरियो में होने वाले ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई कर लिया।

आज की भारतीय हॉकी कप्तान सरदार सिंह, आकाशदीप सिंह, एसके उथप्पा, एसवी सुनील, वी रघुनाथ और टीम के गोलकीपर पी श्रीजेश जैसे प्रतिभावान खिलाड़ियों से सजी है। इस टीम को कोई प्रतिद्वंद्वी हल्के में नहीं ले सकता। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान जफर इकबाल के अनुसार उन्होंने भारतीय टीम का किसी विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ ऐसा खेल पिछले तीस सालों में नहीं देखा था। दरअसल, टीम में यह बदलाव लगातार खेलने से आया है। वहीं भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों को हॉकी इंडिया लीग में विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने के अनुभव का लाभ मिला है। इससे खिलाड़ी विरोधी टीमों की रणनीति समझने लगे हैं जिससे प्रतिद्वंद्वी टीम को कड़ी टक्कर दे पा रहे हैं। यही वजह है कि अब एकतरफा मुकाबले देखने को कम मिल रहे हैं। इस जीत से भारतीय टीम का हौसला अब चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भी बढ़ेगा जो भारत की मेजबानी में ही छह से 14 दिसंबर तक भुवनेश्वर में आयोजित होगी।

एक दौर था जब किसी खेल में यदि भारत को जाना जाता था तो वह है हॉकी। भारतीय पुरुष हॉकी टीम को दुनियाभर में अग्रणी टीम के तौर पर देखा जाता था। आज हॉकी में आॅस्ट्रेलिया की जो स्थिति है उस समय भारत की स्थिति भी वैसी ही थी। भारत में हॉकी की शुरुआत 1925 से हुई थी। 1956 तक भारत का हॉकी की दुनिया पर दबदबा था। देश के पास आठ ओलंपिक स्वर्ण पदकों का उत्कृष्ट रिकॉर्ड है। उसके बाद क्रिकेट के उत्थान और सरकारी उपेक्षा के कारण 1968 के मैक्सिको ओलंपिक के बाद भारतीय हॉकी का आधिपत्य टूटने लगा था। मौजूदा विश्व रैकिंग में भारत 8वें स्थान पर है। भारत में हॉकी उतनी लोकप्रिय भी नहीं रही। हालांकि हाल के दिनों में हॉकी इंडिया लीग की शुरुआत हुई है। इसी कड़ी में इंचियोन एशियाई खेल और अब आॅस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत को देखते हुए उम्मीद की जा रही है भारतीय हॉकी जल्द ही एक मजबूत टीम के रूप में दुनिया में अपनी पहचान कायम कर लेगी। टीम की सफलता देखते हुए भारतीय हॉकी के सुनहरे दिन फिरने की आस बलवती हुई है।

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