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सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदें बरकरार

स्थाई सदस्य देश चाहते हैं कि भारत को स्थाई सदस्यता मिलने पर भी वीटो पावर नहीं मिलना चाहिए।

सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदें बरकरार

संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता हासिल करने की कोशिशों को सोमवार को उस समय एक बड़ी सफलता मिली, जब संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने आम सहमति से सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार पर चर्चा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोरदार पहल के बाद संयुक्त राष्ट्र ने इस दिशा में सक्रियता दिखाई है। वे अपने हर विदेशी दौरे में इसमें सुधार का मुद्दा उठाते रहे हैं। वैसे भी आज विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र प्रभावी नजर नहीं आ रहा है। कुछ देशों ने इसे पंगु बनाकर रख दिया है जिसके कारण इसकी पहचान नखदंतविहीन संगठन के रूप में बन गई है। ऐसे में भारत जैसे देशों को इसमें जगह देने से संयुक्त राष्ट्र के उन उद्देश्यों को साकार करना आसान हो जाएगा जिसकी कल्पना इसकी स्थापना के समय की गई थी। संयुक्त राष्ट्र में सुधार और विस्तार की मांग काफी लंबे समय से चली आ रही है, जो शीत युद्ध खत्म होने के बाद 1992 से तेज हो गई थी, लेकिन अमेरिका आदि देशों ने भारत की मांगों में उतनी दिलचस्पी नहीं दिखाई। बाद में भारत ने साल 1997 में जी-4 नाम से समूह बनाया, जिसमें भारत, र्जमनी, जापान और ब्राजील शामिल हुए। इसने कूटनीतिक दबाव बनाया, लेकिन स्थाई सदस्य देशों ने इसके विरोध में एक नया समूह खड़ा कर दिया, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल था। तब से भारत विश्वभर से स्थाई सदस्यता के लिए सर्मथन जुटाता रहा, जिसमें इसे 23 साल बाद सफलता मिली है।

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भारत के लिए यह खास उपलब्धि इसलिए है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह पहला मौका है, जब विभिन्न सदस्य राष्ट्रों ने इसके लिए अपने लिखित सुझाव दिए हैं। हालांकि इस बार भी अमेरिका, चीन और रूस इसमें शामिल नहीं हुए, लेकिन अन्य देशों ने उनका साथ नहीं दिया। स्थाई सदस्य देश चाहते हैं कि भारत को स्थाई सदस्यता मिलने पर भी वीटो पावर नहीं मिलना चाहिए, जबकि भारत वीटो पावर भी चाहता है, इसीलिए विस्तार पर चर्चा लंबे से टलती रही। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस स्थाई सदस्य हैं। पांचों स्थाई सदस्यों के पास वीटो का अधिकार है। स्थाई सदस्यता पाने की दौड़ में र्जमनी, जापान और ब्राजील भी शामिल हैं। हालांकि भारत के पक्ष में एशिया, यूरोप, अफ्रीका व खाड़ी के अधिकतर देश हैं। इसके अलावा भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। इसकी किसी दूसरे देश पर पहले हमला नहीं करने की नीति है।

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यह विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ सबसे तेज गति से विकास करने वाला देश है। हालांकि सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया पूरी होने में एक साल का समय लगेगा। अब 193 सदस्य देश सुधार के विभिन्न बिंदुओं पर अपने सुझाव देंगे। मसौदा तैयार हो जाने के बाद महासभा में उसे वोटिंग के लिए रखा जाएगा। वहां पास होने के लिए दो-तिहाई वोट की जरूरत होगी। ऐसे में भारत को 129 से अधिक देशों का सर्मथन हासिल करना होगा। सरकार को अभी से इस मुहिम में जुट जाना चाहिए। कुल मिलाकर सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता हासिल करने की भारत की उम्मीदें बरकरार हैं।

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