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इंग्लैंड में टीम इंडिया की करारी हार के सबक

इंग्लैंड ने भारत को चौथे टेस्ट मैच में तीन और पांचवें टेस्ट मैच में सिर्फ ढाई दिन में ही घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

इंग्लैंड में टीम इंडिया की करारी हार के सबक
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साल 2011 में इंग्लैंड और ऑस्टेलिया में लगातार आठ टेस्ट मैच हारने वाली भारतीय क्रिकेट टीम ने चंद रोज पहले जब लॉर्ड्स में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी तो ऐसा लगा था जैसे अब भारतीय टेस्ट क्रिकेट का चेहरा बदलने वाला है, परंतु अब ऐसा कहा जाने लगा है कि वह जीत एक तुक्का थी। लॉर्ड्स में जीत के बाद भारतीय टीम पुराने ढर्रे पर लौट आई और उसका नतीजा रहा कि इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की शृंखला 3-1 की करारी हार के साथ खत्म हुई। इंग्लैंड ने भारत को चौथे टेस्ट मैच में तीन और पांचवें टेस्ट मैच में सिर्फ ढाई दिन में ही घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। भारतीय टीम ने तो अंतिम पांच पारियों में 200 रनों का आंकड़ा भी नहीं छू पाई। वहीं ओवल के अंतिम टेस्ट मैच की दूसरी पारी में पूरी भारतीय टीम सिर्फ 29.2 ओवरों में 94 के स्कोर पर पवेलियन लौट गई, जबकि इंग्लैंड ने उसी पिच पर 486 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। एक मैच ड्रॉ रही थी। श्रृंखला के दौरान टीम इंडिया की फील्डिंग और बल्लेबाजी की बहुत आलोचना हो रही है। इससे पहले भारत को 2013-14 में दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में भी शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। इस तरह विदेशी धरती पर खेले गए पिछले 17 टेस्ट मैचों में से भारत को 13 में हार मिली है। इस हार की वजह से भारतीय टीम की टेस्ट रैंकिंग गिर कर पांचवें स्थान पर पहुंच गई है। ऐसी शर्मनाक हार पर भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की नाराजगी जाहिर है। कई दिग्गज क्रिकेटर भी टीम इंडिया की आलोचना कर रहे हैं। पूर्व खिलाड़ियों ने कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड बीसीसीआई ने इस शर्मनाक हार के बाद कोच डंकन फ्लेचर के पर कतरते हुए पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री को टीम इंडिया का डायरेक्टर बनाया है। साथ ही गेंदबाजी कोच जोए डेव्स और फील्डिंग कोच ट्रेवर पेनी को भी छुट्टी दे दी गई है। वहीं इस करारी हार पर सुनील गावसकर ने कहा कि मुझे नहीं मालूम कि मैं क्या कहूं? शायद यही बात देश के क्रिकेट प्रेमियों के मन में भी उठ रही होगी। गावस्कर ने यहां तक कहा कि अगर खिलाड़ी टेस्ट मैच नहीं खेलना चाहते तो वे इसे छोड़ केवल सीमित ओवरों का क्रिकेट खेलिए, परंतु इस तरह उनको देश को शर्मिंदा नहीं करना चाहिए। भारतीयों के प्रदर्शन देख कर यह कहने में कोई गुरेज नहीं होनी चाहिए कि उन्होंने जिस तरह इंग्लैंड के खिलाड़ियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, वह टेस्ट क्रिकेट के लिए जरूरी जीवटता और संघर्ष की भावना के खिलाफ था। हालांकि इस हार के लिए किसी की जवाबदेही तय करने की चौतरफा उठ रही मांग के बीच हमें विदेशी धरती पर पूर्व में खेले गए टेस्ट मैचों में भारत के प्रदर्शन के रिकॉर्ड पर भी निगाह डालनी चाहिए। दरअसल, यह रोग पुराना है। कुछ लोगों को हटाने से हालात नहीं बदलने वाले। इसके लिए बीसीसीआई को यहां भी इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और आॅस्ट्रेलिया जैसी तेज पिचों का निर्माण करना होगा। और उन पर खिलाड़ियों को अभ्यास कराना होगा, तभी इस तरह की हार से बचा जा सकता है। टीम इंडिया में प्रतिभा की कमी नहीं है। खिलाड़ियों ने पूर्व में यह साबित किया है।
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