Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

प्रतिरक्षा क्षेत्र में भारत का एक और मजबूत

भारत की चिंता की वजह पाकिस्तान के पास बाबर नाम की ऐसी ही मिसाइल मौजूद होना था। क्रूज मिसाइल गाइडेड मिसाइल को कहते हैं।

प्रतिरक्षा क्षेत्र में भारत का एक और मजबूत

नई दिल्ली. भारतीय मिसाइल कार्यक्रम धीरे-धीरे ही सही पर अपने उद्देश्यों में सफल होता दिख रहा है। आज भारतीय सेना कई संहारक रॉकेट और मिसाइल से लैस हो गई है। इनमें बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि से लेकर रणनीतिक रॉकेट पृथ्वी तक तथा पोत-नाशक मिसाइल धनुष से लेकर बर्म वर्षक रॉकेट पिनाका तक शामिल हैं। आज एक तरफ भारतीय सेना में स्वदेशी निर्मित आकाश मिसाइल है तो दूसरी तरफ भारत-रूस के साझा प्रयासों से बनाए गए आवाज की गति से भी तेज गति से मार करने वाले सुपरसोनिक क्रूज-मिसाइल ब्रह्मोस है। कुल मिलाकर आज भारत के पास कम दूरी से लेकर पांच हजार किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल मौजूद हैं। जो जल, थल और नभ कहीं से भी दागी जा सकती हैं। और इनसे परमाणु बम भी छोड़ा जा सकता है, परंतु इसके बाद भी भारत लंबे समय से सबसोनिक क्रूज मिसाइल का अभाव महसूस कर रहा था, जो लंबी दूरी तक मार कर सके।

भारत की चिंता की एक वजह पाकिस्तान के पास बाबर नाम की ऐसी ही मिसाइल मौजूद होना था। क्रूज मिसाइल गाइडेड मिसाइल को कहते हैं। अर्थात जिसे एक जगह से निर्देशित किया जा सके। यह कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से राडार की आंख से बच जाती है। भारत की यह कमी शुक्रवार को दूर हो गई जब डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने निर्भय मिसाइल का सफल परीक्षण किया। दरअसल, पिछले साल इसका पहला परीक्षण असफल हो गया था। फिलहाल इस तरह की मिसाइल भारत के अलावा कुछ चुनिंदा देशों अमेरिका, पाकिस्तान और चीन आदि के पास ही है। निर्भय की मारक रेंज एक हजार किलोमीटर तक है और यह करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकती है। सबसे खास बात यह हैकि इसको डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने देश में ही बनाया गया है।

अग्नि जैसी बैलिस्टिक मिसाइल की बजाय इसमें जहाज की तरह विंग्स और टेल होती हैं। यह रॉकेट की तरह ब्लास्ट के साथ लांच होती है, लेकिन एयरक्राफ्ट की तरह चलती है। यह पृथ्वी से दस से बारह फीट की ऊंचाई पर भी उड़ान भर सकती है। जिससे इसे शत्रु के राडार द्वारा ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। लक्ष्य के पास पहुंचकर यह किसी भी दिशा से हमला कर सकती है। इसे जमीन से, हवा से, सबमरीन से, जहाज से यानी कि लगभग कहीं से भी दागा जा सकता है। आज भारत को अपने पड़ोसी देशों से जिस तरह सुरक्षा के मोर्चे पर चुनौतियां मिल रही हैं, उसके लिए जरूरी हो जाता है कि भारत अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करे। और इसके लिए इस तरह की मिसाइल का निर्माण जरूरी है।

इसके साथ ही सेना को आधुनिक हथियारों से लैस भी करना होगा, तभी सीमाओं पर मिल रही चुनौतियों से निपटा जा सकेगा। वहीं इसके लिए जरूरी है कि भारत हथियारों का उत्पादक बने। दुर्भाग्यवश आज हम सबसे बड़े आयातक हैं। 70 फीसदी हथियारों को आयात करना पड़ता है। और जो सैन्य उपकरण देश में भी बनाए जाते हैं उनमें लगे सभी कलपुर्जे विदेशी होते हैं। मोदी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर-

Next Story
Top