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चिंतनः क्रिकेट को सियासत से अलग रखने की जरूरत

किसी भी सीरीज के लिए बीसीसीआई को सरकार से मंजूरी लेनी होती है।

चिंतनः क्रिकेट को सियासत से अलग रखने की जरूरत
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भारत के साथ पाकिस्तान का बहुप्रतीक्षित क्रिकेट सीरीज ऐलान के बाद सियासत की भेंट चढ़ती दिख रही है। पाकिस्तान की सरकार ने बृहस्पतिवार को वहां के क्रिकेट बोर्ड को इसके लिए हरी झंडी दिखा दी। जिसका भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से भी सकारात्मक संदेश दिया गया।
बोर्ड ने ऐलान किया कि पाक के साथ वनडे व टी-20 सीरीज श्रीलंका में खेली जाएगी। इसके लिए बोर्ड ने भारत सरकार से पत्र लिखकर अनुमति मांगी है, लेकिन अनुमति मिलने या नहीं मिलने की आधिकारिक घोषणा से पहले ही सीरीज पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल किसी भी सीरीज के लिए बीसीसीआई को सरकार से मंजूरी लेनी होती है।

भारत में मैच हो तो गृह मंत्रालय से और भारत के बाहर हो तो विदेश मंत्रालय से। भारत व पाक के बीच र्शीलंका में प्रस्तावित इस सीरीज के लिए विदेश मंत्रालय अनुमति देगा और इस मंत्रालय से ट्विटर पर जो संदेश आ रहे हैं, उससे लगता है कि अनुमति नहीं मिलने वाली है। चूंकि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव के चलते विदेश मंत्रालय अनुमति देने को लेकर दुविधा में नजर आ रहा है। लेकिन यदि सब कुछ ठीक रहा तो दोनों देशों के बीच 15 दिसंबर से क्रिकेट सीरीज का आगाज हो जाएगा, जिसमें टेस्ट, वनडे और अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच खेले जाएंगे।

सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखकर इस सीरीज को श्रीलंका में खेले जाने का निर्णय किया गया है। दरअसल, दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के चलते क्रिकेट संबंधों पर भी असर पड़ रहा है। राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के साथ साथ क्रिकेट संबंध भी बिगड़ा है। इस बार भी जब इसके आसार बन रहे हैं तो देश में इसका विरोध हो रहा है। कई लोगों का तर्क है कि जब पाकिस्तान हमारी भावनाओं का आदर नहीं करता है, जब न तब देश की धरती को सोची समझी रणनीति के तहत लहूलुहान करता रहता है तब उसके साथ किसी तरह का संबंध रखने या क्रिकेट खेलने का क्या औचित्य है।

हालांकि दूसरी ओर से लोग यह भी तर्कदेते हैं कि किसी भी खेल को राजनीति से अलग रखा जानाचाहिए। यदि इससे दो पड़ोसियों के बीच रिश्ते सामान्य होते हैं तो इसे बढ़ावा देना चाहिए। 2012 में एक छोटी सीरीज को छोड़ दें तो भारत-पाकिस्तान के बीच 2007 के बाद से कोई बड़ी द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेली गई है। 2008 में 26/11 को मुंबई में हुए के आतंकी हमलों का साया इस पर भी पड़ा।

हालांकि इससे पहले भीआतंकवादी हमलों में पाक की भूमिका होने या भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के चलते क्रिकेट मैचों के आयोजन रद हुए। 1971 की लड़ाई के बाद दोनों देशों के बीच सात साल तक कोई दौरा नहीं हुआ था।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह पांच साल बंद रहा। करगिल युद्ध के बाद चार साल दोनों देशों नहीं खेले। इसमें कोई दो राय नहीं कि दोनों देशों के रिश्तों में क्रिकेट अहम भूमिका निभाता है। यह दोनों मुल्कों के लोगों को काफी हद तक जोड़ता है। लेकिन दोनों देशों के लिए जरूरी है कि वे क्रिकेट को सियासत से अलग रखें।

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