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सीमा पर शांति लाने का वादा निभाए पाक

अब नियंत्रण रेखा पर भी शांति लाने के लिए दोनों देशों के बीच मिलिट्री ऑपरेशन के महानिदेशक (डीजीएमओ) स्तर की वार्ताहो सकती है।

सीमा पर शांति लाने का वादा निभाए पाक
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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पाकिस्तान रेंर्जस के महानिदेशकों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर शांति बहाल करने को लेकर सहमति बन तो गई है, लेकिन पाकिस्तान उस पर कितना अमल करेगा यह आने वाले कुछ दिनों में पता चल जाएगा। यह आशंका इस लिए बलवती हो रही हैक्योंकि उसके अपने वादों से मुकरने का लंबा इतिहास रहा है। राजधानी दिल्ली में जब यह वार्ता हो रही थी, उसी दौरान सीमा पार से गोलीबारी की घटनाएं अंजाम दी जा रही थीं। भारत और पाकिस्तान के बीच दो तरह की सीमाएं वर्गीकृत हैं। एक आईबी है, दूसरी नियंत्रण रेखा है। फिलहाल यह सहमति आईबी को लेकर है। हालांकि संकेत हैं कि अब नियंत्रण रेखा पर भी शांति लाने के लिए दोनों देशों के बीच मिलिट्री ऑपरेशन के महानिदेशक (डीजीएमओ) स्तर की वार्ताहो सकती है। यदि आईबी पर पाकिस्तान का रवैया सकारात्मक रहा तो ही डीजीएमओ की बैठक से कोई उम्मीद लगा सकेंगे। बहरहाल, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच रूस के शहर उफा में हुईमुलाकात के बाद दोनों देशों के डीजी, डीजीएमओ और एनएसए के बीच बैठक का कार्यक्रम तय हुआ था। हालांकि इससे पहले दोनों देश एसएसए स्तर की वार्ता करने वाले थे, लेकिन पाकिस्तान ने उसमें अड़ंगा लगा दिया। वह पहले से तय आतंकवाद पर बात करने के बजाय कश्मीर को इसमें शामिल करने पर अड़ा रहा।

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1993 में नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम करने और 2004 में भारत के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देने के वादे तो वह कब का भूल चुका है। लाहौर घोषणा पत्र का भी सम्मान नहीं कर रहा जिसमें कहा गया है कि कश्मीर मुद्दे का हल दोनों देश मिलकर निकालेंगे, लेकिन वह अब अलगाववादी हुर्रियत को तीसरा पक्ष बनाने की बातें कर रहा है। दरअसल, आतंकवाद, संघर्ष विराम उल्लंघन, घुसपैठ, मादक पदाथरें की तस्करी और सीमा पर अवैध निर्माण ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर भारत उसके साथ वार्ता चाहता है। इस साल अब तक पाक दौ सौ से ज्यादा बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है। वहीं दर्जनों आतंकवादियों की घुसपैठ करा चुका है और अभी भी सौ से ज्यादा आतंकी भारत में घुसने की फिराक में हैं।

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हाल ही में भारतीय सुरक्षा बलों के हाथ दो जिंदा आतंकी लगे हैं, जो बीते दिनों पाकिस्तान से भारत में हिंसा फैलाने की मंशा से घुसे थे। उन्होंने स्वयं कबूला हैकि पाक स्थित कैंपों में उन्हें आतंकी बनने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है और वहां की सेना ने उन्हें भारत में प्रवेश करने में मदद की है। भारत चाहता हैकि पाकिस्तान इन पर तत्काल विराम लगाए, जिससे इस क्षेत्र में भी अमन का माहौल बन सके क्योंकि ये ऐसे मुद्दे हैं, जो दोनों देशों के बीच कटु होते संबंधों की वजह हैं। सौहार्दपूर्ण हालात में दोनों देश दूसरे विवादों को भी आसानी से सुलझाने में सक्षम हो सकेंगे। पाकिस्तान की समस्या यह है कि वह वार्ताका दिखावा तो करता है, लेकिन उस पर अमल करने की बारी आती है तो मुकर जाता है। अब देखना होगा कि डीजी स्तर की वार्ता का पाकिस्तान कितना मान रखता है।

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