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भारत को उकसाने की हरकत न करे पाक

इस कदम से दोनों देशों के रिश्तों पर अरसे से जमी बर्फ पिघलाने के लिए होने वाली वार्ता से पहले ही विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है।

भारत को उकसाने की हरकत न करे पाक
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आगामी 25 अगस्त को भारत पाक विदेश सचिव स्तर की वार्ता से पहले भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने जिस तरह कश्मीर के अलगाववादी समूहों के विभिन्न नेताओं से मुलाकात करने का फैसला किया है वह एक उकसाने वाला कदम है। इस बैठक में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फरूक, हुर्रियत के चरमपंथी धड़े के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी और हुर्रियत के तीसरे धड़े के शब्बीर अहमद शाह हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि जेकेएलएफ के अध्यक्ष यासीन मलिक को नहीं बुलाया गया है। बासित के इस कदम से दोनों देशों के रिश्तों पर अरसे से जमी बर्फ पिघलाने के लिए होने वाली वार्ता से पहले ही विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है। पाकिस्तान इस तरह भारत की धरती पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अलगाववाद को प्रोत्साहित करने का काम न करे। गत वर्ष पाकिस्तान में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार आने के बाद से विवादों के समाधान की उम्मीद बढ़ी थी। हाल के दिनों में भारत में नई सरकार आने के बाद से उसे परवान चढ़ते देखने की आस लगाई जाने लगी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया था। उसके बाद ही विवादित विषयों को रेखांकित करने के लिए सचिव स्तर की वार्ता करने का फैसला हुआ। इन दिनों पाक की ओर से संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाओं में भी तेजी आई है। भारत हमेशा से कहता रहा है कि कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है। उस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। ऐसे में पाकिस्तान को भारत के अंदर इस तरहकी नापाक हरकत दोनों देशों के बीच कटुता बढ़ाने का ही काम करेगा। पिछले साल भी नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने भारत यात्रा के दौरान अलगाववादियों से मुलाकात की थी। एक तरफ पाकिस्तान भारत से संबंध सुधारने की बात करता है पर वह काम उकसाने वाला कर रहा है। पाक की इन्हीं हरकतों के कारण ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच शांति वार्ता पटरी पर नहीं आ रही है। ऐसा लगता है कि पाक भारत से रिश्ते सुधारने का दिखावा करता है, परंतु उसकी कोशिश कुछ और ही कह रही है। अमेरिकी दबावों के बावजूद वह 26/11 के मुंबई हमलों के दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। पाक इन बातों पर अमल करने की बजाय भारत को उकसा रहा है। उसकी धरती से चलाए जा रहे आतंकी प्रशिक्षण कैंपों से भारत बुरी तरह प्रभावित है। जनवरी 2004 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ किए अहम समझौते में कहा था कि पाकिस्तान की जमीन का भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। इस बात के दस साल बीत गए पर सीमा पार से आतंक में कमी नहीं आ रही है। पाक आतंकियों के कैंपों को ध्वस्त करने की कोशिश भी नहीं कर रहा है। साक्ष्य तो यहां तक मिले हैं कि वह भारत विरोधी तत्वों को आतंकी प्रशिक्षण दे कर उन्हें बढ़ावा दे रहा है। पाक को यह तय करना होगा कि वह अंतत: चाहता क्या है? उसकी नीयत भारत से संबंध बनाए रखने की है तो उकसावे की ये हरकतें बंद करनी होगी। भारत को अब्दुल बासित की हरकत पर सीधे-सीधे इस्लामाबाद को कूटनीतिक भाषा में जवाब देना चाहिए।
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