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चिंतन: जीका रोग से भारत को सतर्क रहने की जरूरत

इस वायरस की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनियाभर में अलर्ट जारी कर दिया है।

चिंतन: जीका रोग से भारत को सतर्क रहने की जरूरत
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भारत अभी दुनिया इबोला की आफत से निपटी भी नहीं है कि एक और खतरनाक वायरस जीका ने दस्तक दे दी है। ब्राजील समेत 23 अमेरिकी देश जीका की चपेट में हैं। ब्राजील के 26 में से 20 राज्यों में इसका संक्रमण है। वहां अक्टूबर से अब तक इसके 4,120 संदिग्ध केस आ चुके हैं। इनमें से 270 की लैब टेस्ट में पुष्टि हो चुकी है। वेनेजुएला में जीका के 4,700 संदिग्ध मामले सामने आए हैं तो फ्रांस में भी पांच लोग संक्रमित पाए गए हैं।

अब तक 50 लोगों की इससे जान जा चुकी है। इस वायरस की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनियाभर में अलर्ट जारी कर दिया है और एक फरवरी को आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में ग्लोबल इमरजेंसी पर फैसला होगा। अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना के वैज्ञानिक इसका उपचार व टीका ढूंढ़ने में जुट गए हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि जीका की वैक्सीन तैयार होने में अभी दो साल लग सकते हैं जबकि इसके आम लोगों तक पहुंचने में एक दशक तक लग सकता है।

यही वजह है कि सबका जोर इस बीमारी को फैलने से रोकने पर है। इस वायरस से सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं को है, क्योंकि इसके वायरस से नवजात शिशुओं को माइक्रोसेफैली होने का खतरा है। माइक्रोसेफैली में बच्चों के मस्तिष्क का पूरा विकास नहीं हो पाता और उनका सिर सामान्य से छोटा रह जाता है। अल सल्वाडोर की सरकार ने तो अपने देश में महिलाओं से अपील की है कि वह अगले दो साल गर्भधारण से बचें।

जीका इसलिए ज्यादा खतरनाक है कि इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हैं। इसमें बुखार जैसे लक्षण होते हैं। शरीर गर्म, बदन में दर्द, आंखों में सूजन, जोड़ों का दर्द और देह पर रैशेस यानी चकत्ते हो जाते हैं। ऐसा भी नहीं है कि जीका बिल्कुल नया वायरस है। 1947 में यूगांडा के जीका के जंगलों में बंदरों में यह वायरस पाया गया। इसी से इसका नाम जीका पड़ा। 1954 में पहले इंसान के अंदर ये वायरस देखा गया। इसके बाद कई दशक तक यह बड़े खतरे के तौर पर सामने नहीं आया और यही वजह रही कि वैज्ञानिक समुदाय ने इसकी ओर ध्यान नहीं दिया।

2007 में माइक्रोनेशिया के एक द्वीप याप में इस वायरस ने बड़ी तेजी से पैर पसारे और फिर यह वायरस कैरीबियाई देशों और लैटिन अमेरिका के देशों में फैल गया। अब 2015 से ब्राजील में पसरा है। इस साल अगस्त में ब्राजील के रियो डि जिनेरो में ओलिंपिक खेल होने वाले हैं। ब्राजील सरकार को डर है कि दुनिया भर से आने वाले खिलाड़ी और दर्शक कहीं इस बीमारी की चपेट में न आ जाए। इसलिए उसने अभी से जीका संक्रमण को रोकने के लिए सवा दो लाख सैनिकों को भी लगा दिया है।

भारत के लिए खतरे की बात इसलिए है कि जीका भी मच्छरों के काटने से होता है जो रुके हुए साफ पानी में पनपता है जैसे डेंगू में होता है। डब्ल्यूएचओ ने भारत सहित उन सभी देशों को एक चेतावनी जारी की है, जहां एडीस मच्छरों के वाहक पाए जाते हैं। 'एडीस ऐगिपटाए' मच्छर जीका वायरस को जन्म देते हैं, यही यलो फीवर, डेंगू व चिकुनगुनिया फैलाता है। भारत डेंगू व चिकुनगुनिया पहले से ही जूझ रहा है, ऐसे में एहतियात के तौर पर सरकार को जीका वायरस से बचाव के प्रति जागरूक करना चाहिए। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने जीका वायरस की सिचुएशन पर नजर रखने के लिए एक ज्वाइंट मॉनिटरिंग कमिटी बनाई है। लेकिन सरकार को और करने की जरूरत है।

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