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भारत-जर्मनी संबंधों को मिला नया आयाम

जर्मनी मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्मार्ट सिटी में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

भारत-जर्मनी संबंधों को मिला नया आयाम
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने करीब दर्जन भर समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं इससे आने वाले दिनों में दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को परवान चढ़ने की उम्मीद की जा रही है। नरेंद्र मोदी ने जर्मनी को भारत का स्वाभाविक सहयोगी बताया है। दुनिया में जिस प्रकार से आर्थिक उथल-पुथल मची हुई है, उसे देखते हुए कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी विश्व अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे सकती है। वहीं दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और रक्षा संबंधों में हुई प्रगति को देखते हुए माना जा रहा है आने वाले दिनों में जर्मनी मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्मार्ट सिटी में बड़ी भूमिका निभा सकता है। जर्मनी को इन क्षेत्रों में महारत हासिल है। सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी जर्मनी ने काफी उन्नति की है। भारत ने बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के विकास का लक्ष्य रखा है। अब इन लक्ष्यों को हासिल करने में जर्मनी भारत का सहयोग करेगा। जर्मनी यूरोपीय यूनियन के देशों में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसके अलावा वह भारत में सातवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल आदान-प्रदान पिछले साल करीब 15.96 अरब यूरो का था। इसमें और वृद्धि की संभावना है। करीब छह महीने पहले प्रधानमंत्री मोदी जर्मनी की यात्रा पर गए थे तब बड़े पैमाने पर वहां के निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया था। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच निवेश की राह में मौजूदा अड़चनों को दूर करने पर चर्चा हुई है। बहरहाल, केंद्र सरकार निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रति गंभीर है। अब समय आ गया है कि जर्मनी के निवेशक भारत के विकास में अपना योगदान दें। जर्मनी भारत के साथ-साथ जी-4 समूह में भी शामिल है, जो लंबे अरसे से संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग कर रहे हैं। जर्मन चांसलर एजेला मर्केल दुनिया के ताकतवर नेताओं में से एक हैं। इन दिनों सीरियाई शरणार्थियों के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए उनकी विश्व में काफी चर्चा हो रही है। यूरोपीय देशों में जर्मनी ने ही सबसे पहले आगे बढ़कर गृहयुद्ध में तबाह हुए शरणार्थियों का स्वागत किया था। मानवता के लिए उठाए गए इस कदम के लिए मर्केल को शांति के लिए नोबल पुरस्कार देने पर विचार चल रहा है। एंजेला मर्केल की सरकार इस शरणार्थी संकट को अवसर के रूप में देख रही है। उनका मानना है कि सीरियाई युवा जर्मनी में कुशल तकनीकी श्रमिकों की पड़ रही कमी को पूरा कर सकते हैं। स्किल इंडिया कार्यक्रम में उनकी रुचि होने का यह भी एक बड़ा कारण है। उनका मानना है कि कौशल युक्त भारतीय युवा आने वाले दिनों में जर्मनी का रुख कर सकते हैं। जर्मनी में इस समय डॉक्टरों, इंजीनियरों और सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की भारी कमी है। बहरहाल, जर्मनी यूरोपीय देशों में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में जाना जाता है, लेकिन उसका चीन की ओर ज्यादा झुकाव है। एंजेला मर्केल की यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई प्रगाढ़ता से उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में जर्मनी सहित यूरोपीय देशों में भारत की अच्छी छवि बनेगी और कारोबार के लिए उनकी प्राथमिकता सूची में भारत प्रमुख स्थान बना सकेगा।
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