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नई ऊंचाई पर भारत व बांग्लादेश के रिश्ते

चार दशक पुराने सीमा संबंधी विवाद को हल करने के लिए हुआ समझौता दोनों देशों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

नई ऊंचाई पर भारत व बांग्लादेश के रिश्ते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा से दोनों देशों की दोस्ती पर भरोसे की मुहर लगी है। इस दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच 22 समझौते हुए। ऐतिहासिक भूमि सीमा समझौता से लेकर आपसी कारोबार बढ़ाने, व्यापार असंतुलन घटाने, क्रेडिट लाइन शुरू करने और बस सेवाएं शुरू करने पर सहमति बनी। चार दशक पुराने सीमा संबंधी विवाद को हल करने के लिए हुआ समझौता दोनों देशों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इसी के साथ दोनों देशों के बीच जारी सीमा विवाद भी खत्म हो गया है। भारतीय संसद ने हाल ही में इस पर अपनी मुहर लगाई थी। इस करार से चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा व मेघालय का नक्शा बदलेगा। इससे पचास हजार लोगों की नागरिकता का रास्ता साफ हो जाएगा। आजादी के बाद से ही यह मुद्दा अटका था। इस समझौते से न सिर्फ सीमाएं सुरक्षित होंगी, बल्कि दोनों देशों के लोगों के जीवन में और स्थायित्व आएगा। वहीं दोनों देशों के बीच दो बस सेवाओं की भी शुरुआत हुई है। इनसे पश्चिम बंगाल को ढाका होते हुए देश के पूवरेत्तर के तीन राज्यों से जोड़ा जाएगा। इससे दोनों देशों के लोगों को आने जाने में काफी सहूलियत होगी। हालांकि तीस्ता जल बंटवारे पर अभी कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है, लेकिन दोनों देशों ने इसका उचित समाधान निकालने का भरोसा जताया है। उम्मीद है कि जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सीमा विवाद को हल करने में परिपक्वता दिखाई है, उसी तरह तीस्ता नदी जल बंटवारे सहित बाकी के मुद्दे भी सुलझा लेंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इन समझौतों के संबंध में खूब सूझबूझ दिखाई है। पूर्व की यूपीए की सरकार उन्हें विश्वास में नहीं ले सकी थी। बांग्लादेश को इस दौरे से काफी कुछ मिला है। वहीं भारत को कूटनीतिक बढ़त मिली है। दरअसल, चीन और पाकिस्तान को रोकने के लिए भारत को बांग्लादेश में अपने पक्ष में माहौल बनाना था। देखा जाए तो प्रधानमंत्री मोदी इसमें कामयाब रहे। बांग्लादेश में सत्ता के दो ही केंद्र रहे हैं। शेख हसीना हमेशा से भारत की सर्मथक रही हैं, जबकि खालिदा जिया का झुकाव पाकिस्तान और चीन की ओर रहा है। हसीना के सत्ता में आने के बाद से भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्ते मजबूत हुए हैं। उन्होंने उत्तर-पूर्व क्षेत्रों के उग्रवादी संगठनों पर कठोर कार्रवाई की है। वहीं खालिदा के जमाने में आईएसआई को खुली छूट मिली हुई थी। अब भूमि सीमा समझौता के बाद निश्चित रूप से बांग्लादेश की जनता खुश हुई होगी। वहीं बांग्लादेश को भारत की ओर से दो अरब डॉलर के कर्ज का ऐलान भी माहौल को बेहतर बनाने में मददगार होगा। ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र में आपसी सहयोग से भी दोनों देशों के बीच विश्वास की डोर और मजबूत होगी। यदि पाकिस्तान को छोड़ दें तो नरेंद्र मोदी की ढाका यात्रा के साथ ही पड़ोसी देशों से रिश्ते सुधारने का एक दौर पूरा होता दिख रहा है। नरेंद्र मोदी पड़ोसी देशों से संबंध सुधारने पर जिस तरह जोर दे रहे हैं वह विदेश नीति में बुनियादी बदलाव का संकेत है। कुल मिलाकर शेख हसीना का प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करना बताता है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।

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