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भारत-बांग्लादेश ने सीमा सुलह की मिसाल पेश की

बंटवारे के दौरान हुई गलतियों को भारत और बांग्लादेश ने मिल बैठकर आखिरकार 68 साल बाद सुधार लिया है।

भारत-बांग्लादेश ने सीमा सुलह की मिसाल पेश की

बंटवारे के दौरान हुई गलतियों को भारत और बांग्लादेश ने मिल बैठकर आखिरकार 68 साल बाद सुधार लिया है। दरअसल, भारत और बांग्लादेश के बीच चार दशक पहले हुआ भूमि सीमा समझौता शुक्रवार आधी रात से लागू हो गया। इससे हजारों लोगों की पहचान, नागरिकता कायम हुई है। साथ ही भारत-बांग्लादेश के बीच सीमा विवाद का भी अंत हो गया है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। दोनों देशों में यह भूमि सीमा समझौता 1974 में हुआ था। भारत की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। बांग्लादेश की संसद ने उसी साल इस व्यवस्था को हरी झंडी दे दी थी पर भारतीय संसद में मामला अटका रहा। इसी साल मई में भारत की संसद में भी सर्वसम्मति से इससे संबंधित विधेयक को पारित किया गया था। और पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश के दौरे पर गए थे तब इस पर अंतिम मुहर लगी थी। अब अगले ग्यारह महीनों में दोनों देश जमीनों की अदला बदली का काम पूरा कर लेंगे।

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इस समझौते के तहत दोनों ओर से कुल 162 एनक्लेव की अदला-बदली होनी है। आमतौर पर एनक्लेव के नाम से पुकारे जाने वाले जमीन के ऐसे टुकड़े हैं जो भारत के होने के बावजूद बांग्लादेश की सीमा से घिरे हैं। यही स्थिति बांग्लादेश के साथ है। भारत के 111 एनक्लेव बांग्लादेश में हैं, जिसका क्षेत्रफल करीब 70 वर्ग किलोमीटर है, वे बांग्लादेश में चले जाएंगे। वहीं बांग्लादेश के 51 एनक्लेव भारत में हैं, जिसका क्षेत्रफल करीब 28 वर्ग किलोमीटर है, वे भारत में आ जाएंगे। जाहिर है, अगले कुछ महीनों में एनक्लेव का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। एक बड़ा सवाल इनमें रहने वाले लोगों की नागरिकता को लेकर था। हालांकि इसका निर्णय उन एनक्लेव में रहने वालों पर छोड़ा गया था। यानी वे अपनी र्मजी से जहां चाहे जा सकते थे। सर्वे के मुताबिक भारत में मौजूद बांग्लादेशी एनक्लेव का कोईभी नागरिक बांग्लादेश जाने को तैयार नहीं हुआ है अर्थात करीब चौदह हजार लोग अब भारत के नागरिक हो गए हैं। वहीं बांग्लादेश में मौजूद भारत के एनक्लेव में रहने वाले अधिकांश लोगों ने बांग्लादेश का नागरिक बनने में दिलचस्पी दिखाई है।

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इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों को फायदा होगा। भारत-बांग्लादेश की सीमा इतनी टेढ़ी-मेढ़ी है कि इसकी निगरानी करना मुश्किल है। जिसकी वजह से देश में अवैध घुसपैठ की समस्या बनी हुई है। अब बांग्लादेश की सीमा से होने वाली घुसपैठ हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। वहीं इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कई दैनिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वे भी अब दूर होंगी। सीमा पर शांति होगी तो आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे। कूटनीतिक लिहाज से भी इसका महत्व है। दरअसल, भारत को पूर्वी सीमा पर जिस तरह की सफलता मिली है, उससे पाकिस्तान और चीन में एक संदेश जरूर गया होगा। इन देशों को भी समझना होगा कि सीमा संबंधी विवादों को दूर किए बिना शांति और समृद्धि की बात बेमानी है। लिहाजा उन्हें भी भारत के साथ मिलकर सीमा समस्या को बिना देर किए दूर कर लेना चाहिए।

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