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बदले राजनीतिक माहौल में छंट रहे मंदी के बादल

केंद्र में तीन दशक बाद किसी सरकार को स्पष्ट बहुमत मिला है

बदले राजनीतिक माहौल में छंट रहे मंदी के बादल

अंर्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं को भी अब लगने लगा है कि केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद भारत में हालात तेजी से सुधर रहे हैं। दोनों संस्थाओं ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब मंदी के दौर से उबर चुकी है और विकास की ओर उन्मुख है। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर चालू वित्त वर्ष में 5.6 और अगले साल 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है। विश्व बैंक ने इसे मोदी डिविडेंड तो आईएमएफ ने इसे मोदी सरकार के सुधारवादी कदमों का नतीजा बताया है।

दरअसल, इसका अनुमान तभी लगाया जाने लगा था जब अगस्त में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने विकास दर संबंधी अपने आंकड़े में कहा था कि वित्त वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी) 5.7 फीसदी रही। पिछली यूपीए सरकार की नीतियों के कारण देश में मंदी जैसे हालात पैदा हो गए थे। विकास दर लगातार दो वर्ष तक पांच फीसदी के नीचे बनी रही। सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा किए गए आर्थिक और नीतिगत पहलों से देश में निराशा का माहौल खत्म हुआ है। उपभोक्ताओं और निवेशकों में आशा का संचार हुआ है। जिससे बाजार में माहौल बेहतर हुआ है। परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था ने फिर से रफ्तार पकड़ी है।

केंद्र में तीन दशक बाद किसी सरकार को स्पष्ट बहुमत मिला है, उससे भी तेजी से फैसले लेने आसान हुए हैं। मसलन रक्षा क्षेत्र व बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी विदेशी निवेश की मंजूरी दी गई है और रेलवे को भी विदेशी निवेशकों के लिए खोल दिया गया है। अब विदेशी निवेशक ढांचागत विकास में सौ फीसदी पूंजी लगा सकते हैं। रियल्टी और टाउनशिप प्रोजेक्ट्स में एफडीआई को सरल बनाया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने के उपाय किए गए हैं। मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया मुहिम चलाई गई है। और कर विवादों को दूर करने के लिए खास व्यवस्था बनाने पर काम हो रहा है।

अब सरकार के एजेंडे में सरकारी क्षेत्रों में विनिवेश की योजना व गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को जल्द लागू करना होना चाहिए, जिस पर विश्व बैंक ने भी ध्यान दिलाया है। नई कर व्यवस्था केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले अलग-अलग परोक्ष करों की जगह लेगी, जिससे व्यापार जगत को बड़ी सहूलियत होगी। इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। वहीं सतर्क भी किया है कि भारत को अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी कड़ी निगाह रखनी होगी। अभी अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सुधरने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने का फायदा भारत को मिला है, परंतु यहां कभी भी उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। क्योंकि वैश्विक आर्थिक वृद्धि की दर धीमी बनी हुई है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी संभावनाएं हैं, जिसको प्राप्त करने के लिए मोदी सरकार को सुधारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाते रहना होगा। हालांकि मोदी सरकार तमाम सुधारों को आगे बढ़ाने को प्रतिबद्ध दिखती है। और उन पर आगे भी बढ़ रही है जिससे आने वाले दिनों में और बेहतर नतीजे देखने को मिल सकते हैं।

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