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आईएस से एकजुट हो लड़े विश्व जगत

अमेरिका ने आरोप लगाए हैं कि रूस आईएस पर हमले के बहाने सीरिया के सत्तारूढ़ राष्ट्रपति बशर अल असद को सत्ता में बनाए रखना चाहता है।

आईएस से एकजुट हो लड़े विश्व जगत
सीरिया में बर्बर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ हवाई हमलों को लेकर रूस और अमेरिका में बढ़ती तनातनी आतंकवाद के खिलाफ विश्व जगत की लड़ाई को कमजोर कर सकती है। अमेरिका ने आरोप लगाए हैं कि रूस आईएस पर हमले के बहाने सीरिया के सत्तारूढ़ राष्ट्रपति बशर अल असद को सत्ता में बनाए रखना चाहता है। हालांकि रूस की ओर से कहा जा रहा हैकि उसके हमलों का मकसद असद सरकार को सर्मथन देना नहीं है बल्कि आईएस को नेस्तनाबूद करना है। रूस की मंशा पर सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि वह इस लड़ाई से लंबे समय से दूर था, सितंबर के अंतिम दिनों में उसने हमले शुरू किए हैं और उसकी सैन्य कार्रवाई में कुछ ऐसे संगठनों पर निशाना बनाया जा रहा है जो आईएस के खिलाफ तो हैं ही, साथ ही असद की तानाशाही हुकूमत के भी खिलाफ हैं। इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और बशर अल असद की पुरानी मित्रता भी अमेरिका और इसकी अगुआई में आईएस के खिलाफ मोर्चा खोले दूसरे देशों को शक करने की वजह दे रही है। दरअसल, सीरिया में असद की तानाशाही से तंग आकर वहां की जनता आक्रोश व्यक्त कर चुकी है। वहां के लोग उनको नापसंद करते हैं। आम सीरियन वहां ऐसी सरकार चाहते हैं जो उनके द्वारा निर्वाचित हो जबकि कहा जा रहा हैकि रूस असद को ही सत्ता में बनाए रखना चाहता है। यदि ऐसा है तो यह कदम सीरिया की जनता में असंतोष बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ विश्व समुदाय की एकजुटता को भी प्रभावित कर सकता है। इससे आईएस के खिलाफ लड़ाई कमजोर हो सकती है। आज आईएस मध्य एशिया के देशों में किस तरह का कहर बरपा रहा है इसे बताने की जरूरत नहीं है। इसने सीरिया और इराक आदि देशों के एक बड़े भू-भाग पर आधिपत्य स्थापित कर लिया है। इन देशों की जनता इसकी पकड़ से आजाद होने के लिए छटपटा रही है। दरअसल, सीरिया में रूस और अमेरिका के आमने-सामने आने के कूटनीतिक कारण भी हैं। रूस विश्व मंच पर अमेरिका को नजरअंदाज कर अपनी ताकत दिखाना चाहता है। यूक्रेन में वह ऐसा कर चुका है। इसके अलावा वहां इन दोनों के अपने-अपने हित हैं, जिसकी पूर्ति तभी होगी जब कोईएक कमजोर होगा। बहरहाल, समय की मांग हैकि दोनों देश अपने-अपने मतभेदों को भुलाकर विश्व में अमन चैन के दुश्मन बन गए दहशतगदरें के विरुद्ध एकसाथ मिलकर लड़ें। इसमें कोईदो राय नहीं ये ताकतें मानवता की प्रबल शत्रु बन गईहैं। इन्हें पनपने और परवान चढ़ने का मौका रूस और अमेरिका के मध्य दशकों लंबे चले शीतयुद्ध के कारणवश ही मिला है। हालांकि सीरिया में रूस की दखलंदाजी ने दुष्ट ताकतों से एकजुट होकर लोहा लेने का रास्ता साफ कर दिया है। अब अमेरिका और रूस को मौजूदा संवादहीनता को दूर कर लेना चाहिए। इससे दोनों के बीच संपूर्ण मध्य एशिया क्षेत्र में कूटनीतिक सहयोग का रास्ता साफ हो सकता है। ऐसा होने पर न सिर्फ गृहयुद्ध और आतंकवाद से जूझ रहे इस क्षेत्र में शांति आएगी, बल्कि युद्धग्रस्त मध्य एशिया के शरणार्थी संकट से जूझते हुए यूरोपीय राष्ट्रों की चिंताएं भी दूर हो जाएंगी।
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