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चिंतन: सुधार पर ही रहे भारतीय अर्थव्यवस्था का फोकस

एफएओ ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2015 में खाने-पीने की चाजों के दाम 19 फीसदी गिरे हैं।

चिंतन: सुधार पर ही रहे भारतीय अर्थव्यवस्था का फोकस

एक तरफ जहां दुनिया की अर्थव्यवस्था मंदी के दरवाजे पर खड़ी है, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। ग्लोबल परार्मश कंपनी पीडब्ल्यूसी (प्राइस वाटरहाउस कूपर्स) की ताजा रिपोर्ट से इस तथ्य को बल मिलता है, जिसमें कहा गया गया है कि चालू वर्ष 2016 में उभरते बाजार वाली अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाला देश होगा।

पीडब्ल्यूसी ने कहा है कि भारत इस वर्ष 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगा, जो लगातार दूसरे साल चीन की आर्थिक वृद्धि से अधिक होगी। पीडब्ल्यूसी ने अपनी रिपोर्ट में जिन सात उभरती अर्थव्यवस्थाओं का जिक्र किया है उनमें भारत के अलावा चीन, रूस, ब्राजील, मेक्सिको, इंडोनेशिया और तुर्की है। इस रिपोर्ट में चीन के बारे में कहा गया है कि उसकी अर्थव्यवस्था में नरमी आएगी, जबकि ब्राजील और रूस की अर्थव्यवस्था में संकुचन आएगा।

खास बात यह है कि पीडब्ल्यूसी ने सात विकसित देशों-अमेरिका, जापान, र्जमनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं के बारे में कहा है कि 2010 के बाद से अब पहली बार इनमें वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि ग्लोबल वित्तीय फार्म मोर्गन स्टेनले के रुचिर शर्मा शंका जता रहे हैं कि दुनिया की अर्थव्यवस्था 2008 की तरह एक बार फिर मंदी के द्वार पर खड़ी है। और अपनी शंका के पक्ष में वे तर्क भी देते हैं कि हर आठ साल में एक बार मंदी का चक्र लौटता है, चीन की हालत खस्ता है, दुनिया भर में कमोडिटी व जिंसों की कीमतें स्थिर हैं, या गिर रही हैं, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड रिर्जव ब्याज दर बढ़ाने की पोजीशन में नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र की इकाई खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2015 में खाने-पीने की चाजों के दाम 19 फीसदी गिरे हैं। खपत में कमी आना और इन्फ्लेशन का उम्मीद से ज्यादा गिरना किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। इससे मोर्गन स्टेनले की शंकाओं को बल मिलता है। चीन को भी देखें तो पिछले एक साल में उसकी अर्थव्यवस्था का बुलबुला फटा है, जिसके चलते उसे अपनी मुद्रा युआन का बार-बार अवमूल्यन करना पड़ा है। फिर भी उसका निर्यात पटरी पर नहीं लौट रहा है, चीन आर्थिक मोर्चे पर मांग की व्यापक सुस्ती झेल रहा है।

ऐसे में अगर पीडब्ल्यूसी भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक रिपोर्ट दे रहा है और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जो खुद वित्त मंत्री रह चुके हैं, कह रहे हैं कि देश तेजी से विकास कर रहा है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था और मोदी सरकार के लिए सुकून देने वाली बात है। भारत के मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने की वजह भी है।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्राओं में ग्लोबल संधियों के जरिये इसको बूस्ट कर रहे हैं और देश में आर्थिक सुधार की दिशा में तेजी से कदम उठा रहे हैं। विपक्ष के असहयोग के बावजूद मोदी सरकार का पूरा फोकस आर्थिक सुधार पर है। खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी इसे दोहराया है। अब जबकि सरकार आम बजट की तैयारी कर रही है, तो उसकी कोशिश होनी चाहिए कि वह इसमें इकॉनोमिक रिफॉर्म का बिग एजेंडा पेश करे, ताकि भारत ग्रोथ इंजन बन सके।

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