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आयातित हथियारों पर निर्भरता ठीक नहीं, रणनीतिक भागीदार बने भारत

अब समय आ गया हैकि विदेशी कंपनियां भारत में रक्षा उद्योग लगाएं और सिर्फ विक्रेता बनने की बजाय रणनीतिक भागीदार बनें।

आयातित हथियारों पर निर्भरता ठीक नहीं, रणनीतिक भागीदार बने भारत
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बेंगलुरु में एयरो इंडिया-2015 के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश को सुरक्षित और संपन्न बनाना है तो हमें विदेशी रक्षा सामानों पर से निर्भरता कम करनी होगी और देश में ही उनका उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने अगले पांच साल में देश में रक्षा उत्पादन को दोगुना करने की बात भी कही है। देखा जाए तो देश के सामने आज जिस तरह की सामरिक चुनौतियां हैं, उसके हिसाब से हमारी रक्षा तैयारियां नाकाफी हैं।

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इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हमें अपनी रक्षा तैयारियों को बढ़ाना और सेना का समय रहते आधुनिकीकरण करना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया कार्यक्रम और 49 फीसदी विदेशी निवेश की मंजूरी देकर इसकी पहल कर दी है। हाल के दिनों में कई हथियार निर्माता कंपनियों नेइस योजना में दिलचस्पी दिखाई भी है। देश में रक्षा सामग्रियों का उत्पादन करने वाली कंपनियों को कई दूसरी सहूलियतें दी जा रही हैं।

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अब समय आ गया हैकि विदेशी कंपनियां भारत में रक्षा उद्योग लगाएं और सिर्फ विक्रेता बनने की बजाय रणनीतिक भागीदार बनें। भारत अभी तक अपनी रक्षा जरूरतों की पूर्ति विभिन्न देशों जैसे-अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और इजरायल आदि से आयात के जरिए करता रहा है। आज भारत दुनिया में सबसे ज्यादा हथियारों का आयात करता है। हम अपनी जरूरतों का करीब सत्तर फीसदी रक्षा उपकरण और हथियार आयात करते हैं और सिर्फ तीस फीसदी हथियारों का ही निर्माण देश में होता है। भारत में उत्पादित ज्यादातर हथियारों में भी विदेशी कलपूर्जे ही लगे होते हैं। ज्यादा आयात की वजह से ही देश में बहुत सारे रक्षा सौदों से जुडेÞ घोटाले सामने आए हैं। चूंकि रक्षा सौदे करोड़ों-अरबों रुपयों में होते हैं और कई प्रक्रियाओं में पूरा होते हैं, ऐसे में इसमें दलाली के मामले भी खूब सामने आए हैं। यही नहीं विदेशी कंपनियां कई बार ऐसी शर्तें थोप देती हैं जो देश की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होतीं। कई बार रक्षा सामानों की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में आ जाती है।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि भारत जिन हथियारों का प्रयोग करता है उनकी गोपनीयता भंग हो जाती है। इसका बड़ा दोष यह भी है कि आज कोई सौदा होता है और उसे सेना में शामिल होने में कई साल लग जाते हैं। जिससे वह तकनीकी पुरानी हो जाती है। इस प्रकार भारतीय सेना को उस पुरानी तकनीकी से ही काम चलाना पड़ता है। यह सेना के आधुनिकीकरण में सबसे बड़ी बाधा है। ये सारी चीजें तभी खत्म हो सकती हैं जब भारत रक्षा से जुड़े साजो-सामान और उपकरणों को स्वयं ही बनाए। इससे देश की सुरक्षा मजबूत तो होगी है, रक्षा सौदों में पारदर्शिता भी आएगी।

मजबूत रक्षा उद्योग न सिर्फ भारत को और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि संपन्न भी बनाएगा। क्योंकि इस सेक्टर में रोजगार के काफी मौके हैं। देश में रक्षा उद्योग लगेंगे तो इससे निवेश बढ़ेगा, विनिर्माण का प्रसार होगा, उद्यम को सहायता मिलेगी, प्रौद्योगिकी का स्तर बढ़ेगा और देश में आर्थिक वृद्धि बढ़ेगी। यह बड़ी विडंबना है कि आजादी के छह दशक बीत जाने के बाद भी हम रक्षा उत्पादन में अभी तक आत्मनिर्भर नहीं बना पाए हैं। मोदी सरकार ने इस हालात को बदलने के लिए जोरदार पहल की है, जिससे उम्मीद बढ़ी है। हाल के दिनों में बहुत सारे फैसलों, जो कई साल से लटके थे, को नए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अंजाम तक पहुंचाया है।

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