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चिंतन: उत्तर कोरिया ने हाइड्रोन बम के परीक्षण से पैदा की नई मुसीबत

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के अड़ियल रुख के कारण पूर्वी एशिया में खतरनाक हालात पैदा होते रहे हैं।

चिंतन: उत्तर कोरिया ने हाइड्रोन बम के परीक्षण से पैदा की नई मुसीबत
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उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर पूरी दुनिया के सामने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। माना जा रहा है कि इस दौरान धरती के अंदर हुए तेज धमाके के कारण उसके परमाणु परीक्षण केंद्र पुन्गेय-री के पास भूकंप के 5.1 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। उत्तर कोरिया का विवादों से गहरा नाता रहा है। वहां के तानाशाह किम जोंग उन के अड़ियल रुख के कारण पूर्वी एशिया में खतरनाक हालात पैदा होते रहे हैं। यही वजह है कि अधिकांश देश उन्हें नापसंद करते हैं। दरअसल, उत्तर कोरिया ने 1994 में एक सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम पर कार्य करना शुरू किया था, लेकिन तभी अंतरराष्ट्रीय शक्तियां उसे एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर कराने में सफल हो गई थीं जिसके तहत उसे अपनी सभी परमाणु गतिविधियों पर रोक लगानी थी। हालांकि वह इस पर ज्यादा दिनों तक टिका नहीं रहा और दिसंबर 2002 में उसने एक बार फिर अपने परमाणु संयंत्र शुरू कर दिए। उसके बाद अमेरिका आदि देशों के साथ उसके तनाव दिनोंदिन बढ़ते गए। हालात तब और खराब हो गए जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने उसे दुष्टता की धुरी का एक हिस्सा बता दिया। उत्तर कोरिया के साथ दक्षिण कोरिया और जापान की दुश्मनी वर्षों पुरानी है, लेकिन हकीकत यह है कि वह इनके जरिए अमेरिका को भी उकसाता है। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया सीमा विवाद को लेकर हमेशा उलझते रहे हैं। कई बार युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन अपने क्रूर स्वभाव के लिए भी जाने जाते रहे हैं। वे हथियारों के पीछे जिस तरह से भाग रहे हैं वह हैरान करने वाला है। उत्तर कोरिया आज विकास के हर मोर्चे पर विफल है। सामाजिक आर्थिक रूप से उसकी दयनीय स्थिति सर्वविदित है। मानव विकास के मामले में दुनिया में वह 174वें स्थान पर स्थित है। वहां लोकतंत्र का नामोनिशान नहीं है। किम जोंग उन की मर्जी के बिना वहां कुछ नहीं होता है। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपने जिद के कारण देश की बड़ी आबादी को भुखमरी के कगार पर ला कर छोड़ दिया है। यही नहीं वे दूसरे देशों के लिए खतरा पैदा करते जा रहे हैं। यह पहला अवसर नहीं है कि उत्तर कोरिया ने जनसंहारक हथियारों का परीक्षण किया है। इससे पहले 2006 में उसने परमाणु बम का परीक्षण किया था तभी से संयुक्त राष्ट्र संघ ने उस पर कड़ा प्रतिबंध लगा रखा है, परंतु इसके बावजूद उसने 2009 और 2013 में परमाणु बम के परीक्षण किए। और अब चौथी बार उसने वैसा ही दुस्साहस किया है। उसने इस परीक्षण से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन किया है। एक अलोकतांत्रिक और सनकी शासक के हाथों में ऐसे विनाशकारी हथियार होने का अर्थ है कि दुनिया में कभी भी तबाही आ सकती है। वैसे भी हाइड्रोजन बम परमाणु बम की तुलना में काफी शक्तिशाली होता है। ऐसे गैर जिम्मेदार शासक को सबक सिखाने के लिए सभी देशों को एकजुट होना होगा। बहरहाल, अमेरिका, जापान आदि देशों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इस कदम को पूरी दुनिया खासकर पूर्वी एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बताया है। चीन ने भी इसे अवांछनीय और अदूरदर्शी कदम बताया है। अब देखना है कि विश्व जगत क्या फैसला लेता है।
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