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नेहरू जयंती के नाम पर यह कैसी राजनीति

भारत को बहुत सारी जरूरतों की पूर्ति के लिए विदेशों से होने वाले आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

नेहरू जयंती के नाम पर यह कैसी राजनीति
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देश के प्रथम प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी पंडित जवाहर लाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता माने जाते हैं। यह उन्हीं की देन है कि आज देश में लोकतंत्र फल-फूल रहा है। ऐसे में क्या नेहरू पर किसी एक पार्टी या दल (जैसा कि कांग्रेस दावा कर रही है) का अधिकार हो सकता है। मेनका गांधी ने ठीक कहा हैकि नेहरू किसी की बपौती नहीं हो सकते हैं, बल्कि वे तो राष्ट्र की धरोहर हैं। ऐसे में उन पर पूरे भारत का अधिकार है।

नेहरू की 125वीं जयंती के अवसर पर केंद्र में गठित भाजपा की अगुआई वाली एनडीए सरकार ने कई आयोजन किए हैं। मोदी सरकार ने इसे बाल स्वच्छता से जोड़ कर एक सकारात्मक पहल किया है। इस अवसर पर कांग्रेस भी अलग से जयंती मना रही है। यह ठीक हैकि नेहरू कांग्रेस पार्टी के थे, लेकिन वह जिस तरह से विरासत के नाम पर उनकी जयंती का आयोजन कर रही है, वह उसकी ओछी मानसिकता का परिचय दे रहा है। एक तो इस आयोजन पर उसने देश के दूसरे दलों सहित दुनिया के करीब पचास नेताओं को आमंत्रित किया है, जबकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नहीं बुलाया है।

दूसरे तालकटोरा स्टेडियम में जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान नेहरू के विचारों पर बोलने की बजाय उसके नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की ही आलोचना करते रहे, तो कांग्रेस की ओर से ये कैसी जयंती मनाई जा रही है? ऐसे में भाजपा इस विरासत पर सवाल उठा रही है तो गलत क्या है? क्या नेहरू ने ही इनसे कहा था कि घोटाले दर घोटाले करते जाएं। महंगाई को बेतहाशा बढ़ने दें। उसे थामने के प्रयास न करें। कांग्रेस पार्टी के इतने सालों के शासन के बाद भी देश में गरीबी, अशिक्षा, गैर-बराबरी क्यों बढ़ती गई। क्या पंडित नेहरू की नीति उनसे यही कहती है, जो उनकी विरासत पर कांग्रेस को आज इतना घमंड है।

आज देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। बहुत सारी जरूरतों की पूर्ति के लिए विदेशों से होने वाले आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है। तो प्रश्न उठता है कि नेहरू के नाम को अपनाने वालों ने किया ही क्या है? क्या नेहरू ने ऐसे ही भारत का सपना देखा था, जैसा कांग्रेस की अगुआई वाली मनमोहन सिंह की सरकार ने मई में मोदी सरकार को सौंपा था। राहुल गांधी स्वच्छता अभियान की निंदा कर रहे हैं। हिंदी को बढ़ावा देने की भी आलोचना कर रहे हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि उनकी कांग्रेस आखिर कैसा भारत बनाना चाहती है।

आज दुनिया मोदी की तरीफ कर रही है। उनके प्रयासों की हर तरफ सराहना मिल रही है। सभी प्रमुख देशों के राष्ट्रध्यक्ष उनसे मिलने को उत्सुक हैं। नरेंद्र मोदी की बदौलत भारत के प्रति उनका नजरिया बदला है। अपने करीब छह माह के शासन के दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार ने जवाबदेश व पारदर्शी शासन का ढांचा खड़ा किया है। मुद्रास्फीति की दर लगातार कम हो रही है। जिससे आम आदमी को महंगाई की मार से राहत मिली है। ऐसे में कांग्रेस नेहरू जयंती के मौके पर भी प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को निशाने पर ले रही है तो इससे उसकी हताशा ही जाहिर होती है। इससे स्पष्ट होता है कि मई के आम चुनावों के नतीजों को वह पचा नहीं पा रही है। इस तरह वह ऐसे गर्त में जा रही है जहां से निकलना आसान नहीं होगा।

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