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काले धन के खिलाफ सक्रियता से बढ़ी उम्मीद

केंद्र सरकार ने विदेशी बैंकों के 627 खाताधारकों की सूची सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत को सौंप दी है।

काले धन के खिलाफ सक्रियता से बढ़ी उम्मीद
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काला धन के खिलाफ केंद्र सरकार के अब तक के रुख से स्पष्ट हैकि उसकी मंशा इसके रहस्य से जल्द से जल्द परदा उठाने की रही है। यह उसके पांच महीने के कार्यकाल में भी बखूबी देखी जा सकती है। शपथ ग्रहण के एक दिन बाद पहले ही कैबिनेट की बैठक में मोदी सरकार ने कालेधन की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था। और उसके बाद अमेरिका, स्विटजरलैंड सहित विभिन्न देशों के साथ समझौते करने के लिए लगातार बातचीत कर रही हैजिससे विदेशों में काला धन रखने वाले भारतीयों के बारे में पता चल सके। वहीं अब तक की जांच के आधार पर उसने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आठ नामों का खुलासा भी किया, जिनके नाम से विदेशी बैंकों में अवैध धन जमा हैं।

दरअसल, केंद्र सरकार का तर्क रहा है कि सरकार विदेशों से पूर्व में किए गये गोपनीयता संधि से बंधी हुई है और सभी नामों को खुलासा करने की बजाय सिर्फ उन्हीं नामों को सार्वजनिक कर सकती है जिनकी जांच पूरी हुई है। अर्थात जिनके बारे में सरकार आश्वस्त हैकि उनके खाते में रखा पैसा काला धन है। क्योंकि यदि उसने संधि की गोपनीयता को बरकरार नहीं रखा तो आगे उन देशों से खातों की जानकारी प्राप्त करना कठिन हो सकता है। वहीं यह जरूरी नहीं कि विदेशी बैंकों में खुले सारे खाते अवैध ही हों। सभी को विदेशी बैंकों में खाता खोलने और एक तय रकम जमा करने का अधिकार है। लिहाजा इससे निजता का अधिकार का भी उल्लंधन होता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इन दलीलों को नहीं माना।

अब केंद्र सरकार ने विदेशी बैंकों के 627 खाताधारकों की सूची सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत को सौंप दी है। लिफाफे में नाम, पता के अलावा सरकार ने उनकी स्टेटस रिपोर्ट भी दी है, जिसमें उन खातों पर अब तक उसकी ओर से क्या कार्रवाई हुई इसकी जानकारी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस सूची को एसीआईटी के हवाले कर दिया है। और कहा है कि एसीआईटी सारे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नवंबर तक जांच की स्टेटस रिपोर्ट उसे सौंपे। हालांकि मोदी सरकार ने इस सूची को जून में ही एसआईटी के हवाले कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने नामों की गोपनीयता बनाए रख एक तरह से केंद्र सरकार के तर्कों को मान्यता दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि इन खातों की जांच 31 मार्च, 2015 तक पूरी कर ली जाएगी।

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के अनुसार इस सूची में आधे से ज्यादा भारत के नागरिक हैं, जबकि बाकी एनआरआई हैं, जिन पर इनकम टैक्स लागू नहीं होता। यह वही सूची है जिसे एचएसबीसी के एक कर्मचारी ने स्विटजरलैंड के बैंक से चुराई थी। उसके बाद यह सूची फ्रांस के पास गई थी। फ्रांस सरकार ने सशर्त इसे भारत से जुलाई 2011 में साझा किया था। हालांकि इसके अलावा अभी भी करीब 70 देश ऐसे हैं जो टैक्स हैवन माने जाते हैं और जहां भारतीयों के कालाधन होने का अनुमान है लेकिन भारत सरकार के पास उनकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। केंद्र सरकार को ये नाम तभी मिल पाएंगे जब उन देशों को विश्वास में लेकर संधि की जाए। केंद्र सरकार सभी देशों से ऐसे समझौते करने की प्रक्रिया में काम कर रही है जिससे सभी भारतीय खाता धारकों के नाम प्राप्त हो सके। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट की सामूहिक कार्रवाई के बाद विदेशी बैंकों में काले धन रखने वाले सभी बड़ी-छोटी मछलियों के नाम देश के सामने आ सकेगा।

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