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चिंतन: हिरोशिमा से ओबामा के शांति संदेश के मायने

यह विश्व का पहला परमाणु हमला था। इसमें एक लाख चालीस हजार निर्दोष लोग मारे गए थे।

चिंतन: हिरोशिमा से ओबामा के शांति संदेश के मायने
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जापान के हिरोशिमा की यात्रा कर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 'इतिहास की बड़ी गलतियों' के लिए प्रायश्चित ही किया है। विश्व उस विभीषिका को कैसे भुला सकता है, जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हार सामने देख बौखलाहट में अमेरिका ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा और नागासाकी पर एक के बाद एक दो परमाणु बम गिरा दिए थे। छह अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था। यह विश्व का पहला परमाणु हमला था।

इसमें एक लाख चालीस हजार निर्दोष लोग मारे गए थे। ठीक तीन दिन बाद नौ अगस्त 1945 को अमेरिका ने विश्व का दूसरा परमाणु हमला जापान के ही दूसरे शहर नागासाकी पर कर दिया था। इसमें 80 हजार लोग मारे गए। दोनों ही हमलों में मरने वालों में 50 हजार कोरियाई सैनिक भी शामिल थे। और एटमी बम हमला न हो जाए, इसको देखते हुए जापान ने एक सप्ताह बाद ही अमेरिकी नेतृत्व वाली मित्र राष्ट्रों की सेना के सामने आत्मसर्मपण कर दिया था। इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया था। लेकिन यह युद्ध मानवता पर गहरा घाव छोड़ गया था। जापान तो तबाह ही हो गया था।

लेकिन वह फिर उठ खड़ा हुआ और आज एक मजबूत ताकत है। वह दुनिया के विकसित देशों में शुमार है। अब तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने हिरोशिमा जाने की हिम्मत नहीं दिखाई थी। 71 साल बीत गए। बराक ओबामा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए, जिन्होंने हिरोशिमा के पीस मेमोरियल पार्क में र्शद्धांजलि दी। इसका ऐतिहासिक महत्व भी है और कूटनीतिक महत्व भी है। ऐतिहासिक इस मायने में कि 19वीं सदी में ताकतवर रहे देश बदले हुए वैश्विक व्यवस्था में पुरानी सामंती सोच से बाहर निकल रहे हैं और अपराजय रहने के दंभ को तिलांजलि दे रहे हैं। वे अब नए सिरे से ग्लोबल समीकरण बना रहे हैं, इसके लिए वे इतिहास में की गई अपनी गलतियों पर पश्चाताप भी कर रहे हैं।

कुछ साल पहले ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ ने भारत के जलियांवाला बाग की ऐतिहासिक यात्रा की थी। भारत पर ब्रिटिश हुकूमत के दौर में स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए अमृतसर के जलियांवाला बाग में सभा के दौरान निहत्थे बेकसूरों पर जनरल डायर ने गोलियां चलवा दी थीं, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। ब्रिटिश शासन ने भी भारत को आर्थिक रूप से जर्जर बना दिया था। 1947 में मिली आजादी के बाद 69 साल में आज भारत भी तेजी से प्रगति कर रहा मजबूत विकासशील देश है। इसलिए एलिजाबेथ की वह यात्रा भी एक प्रायश्चित यात्रा थी और भारत व ब्रिटेन के संबंध को बदली ग्लोबल परिस्थिति में नए आयाम देने की कोशिश थी।

कूटनीतिक इस मायने में कि चीन बड़ी सैन्य ताकत के रूप में उभर रहा है। दक्षिण सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका भारत और जापान के साथ अपने संबंधों को मजबूती दे रहे हैं। जापान को भी चीन से ही खतरा महसूस हो रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद भी है। इसलिए ओबामा की जापान यात्रा वाशिंगटन और टोक्यो के बीच मजबूत रिश्ते दिखाने की कूटनीति भी है। ओबामा अपने कार्यकाल के आखिरी वर्ष में हिरोशिमा जाकर आधुनिक अमेरिकी इतिहास में अमर भी हो जाएंगे। इसके साथ ही ओबामा का हिरोशिमा से वैश्विक शांति के लिए नैतिक क्रांति का संदेश देना भी सराहनीय है। वहां से उन्होंने परमाणु हथियार मुक् त विश्व की पैरवी की है। उन्मादी उत्तर कोरिया और वहशी आतंकी गुटों को देखते हुए उनकी यह पैरवी भी विश्व के लिए अहम शांति संदेश है।

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