Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

चिंतन: ताकि युवाओं के सपनों पर ग्रहण न लगे

समिति ने सी-सैट को कला और समाज विज्ञान संकाय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के खिलाफ बताया है।

चिंतन: ताकि युवाओं के सपनों पर ग्रहण न लगे
X
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) छात्रों को सबसे ज्यादा आकर्षित करती है। इसके लिए छात्र हरसंभव मेहनत करते हैं परंतु सफलता कुछ को ही मिलती है। विषयों के गहन ज्ञान के अभाव या नेतृत्व करने की क्षमता की कमी के कारण असफलता तो समझ में आती है परंतु किसी छात्र को सिर्फ इसलिए असफलता का सामना करना पड़े, भले ही वह प्रतिभावान हो, कि वह अंग्रेजी भाषा में पूरी तरह दक्ष नहीं है, यह कहीं से भी न्यायपूर्ण नहीं है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) हर साल आईएएस के लिए परीक्षा आयोजित करता है, परंतु इन दिनों यह परीक्षा प्रणाली ही विवादों में है। छात्रों का आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर सी-सैट ऐसे छात्रों से सिविल सेवा में जाने का मौका छीन रही है, जिनकी पृष्ठभूमि ग्रामीण रही है और जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से पढ़ाई नहीं की है। इससे अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों, खासकर जिनकी पृष्ठभूमि विज्ञान, इंजीनियरिंग या मेडिकल की रही है, को फायदा मिल रहा है, जबकि गैर-अंग्रेजी माध्यम एवं गैर-विज्ञान पृष्ठभूमि के उम्मीदवार बुरी तरह पिछड़ रहे हैं।
सी-सैट में अंग्रेजी भाषा के प्रश्न पत्र में क्वालिफाई करना अनिवार्य किया गया है। वहीं प्रश्न पत्र में अंग्रेजी का जो अनुवाद हिंदी में होता है वो सरल हिंदी न होकर बहुत ही जटिल होता है। हिंदी माध्यम या गैर-अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवार अपनी भाषा में अनुवाद किए गए प्रश्नों को उसके बदतर अनुवाद की वजह से नहीं समझ पाते हैं और छोड़ देते हैं। सी-सैट स्क्रीनिंग परीक्षा है। इसके अंक कुल मेरिट में भी नहीं जुड़ते हैं। 2011 में सिविल सर्विसेज परीक्षा का पैटर्न यह कहकर बदला गया था कि इससे कोचिंग का प्रभाव घटेगा और प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को बेहतर मौका मिलेगा परंतु हिंदी भाषी छात्रों के सामने यही बड़ी बाधा साबित हो रही है। यूपीएससी द्वारा ही गठित निगवेकर समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सी-सैट की वजह से यूपीएससी की परीक्षा दे रहे सभी छात्रों को एक समान अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
समिति ने सी-सैट को कला और समाज विज्ञान संकाय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के खिलाफ बताया है। वहीं सिविल सेवकों को प्रशिक्षण देने वाली मसूरी स्थित संस्था लाल बहादुर शास्त्री अकादमी की 2013 में आई रिपोर्ट के मुताबिक 2011 में सिविल सेवा में सी-सैट लागू होने के बाद से ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के चयन में भारी कमी आई है। भाषा के नाम पर छात्रों के साथ इस तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए। सभी परीक्षाएं हिंदी सहित क्षेत्रीय भाषाओं में भी होनी चाहिए। इससे गरीब और ग्रामीण छात्रों को भी अपनी योग्यता दिखाने का अवसर मिलता है। एक भाषा के न जानने या कम जानने के कारण उनको समान अवसर से वंचित करना उचित नहीं है। छात्रों की तीन मांगें हैं। प्रारंभिक परीक्षा से सी-सैट को हटा दिया जाए, मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्न पत्र को सरल किया जाए, हिंदी के प्रश्न पत्र सरल और सामान्य हिंदी में लिखे जाएं। हालांकि केंद्र सरकार की इस मुद्दे पर सजगता ने एक उम्मीद जगाई है। अब देखना है कि सरकार और यूपीएससी क्या फैसला करते हैं। बहरहाल, जो भी फैसले हों उसमें छात्रों के व्यापक हित को तरजीह दी जानी चाहिए।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top