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GST BILL: सबसे बड़े कर सुधार के रास्ते पर बढ़े कदम

माना जा रहा है कि जीएसटी आने के बाद कर का ढांचा पारदर्शी होगा और असमानता नहीं होगी।

GST BILL: सबसे बड़े कर सुधार के रास्ते पर बढ़े कदम
बहुप्रतीक्षित वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) बिल शुक्रवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया। तमिलनाडु को छोड़कर अधिकांश राज्यों ने इस पर अपनी सहमति जता दी है। यह संविधान संशोधन विधेयक है, लिहाजा इसे दोनों सदनों से दो तिहाई बहुमत से पारित कराना जरूरी है। एक बार संसद सेपारित होने के बाद इसे आधे राज्यों द्वारा अनुमोदित किया जाना भी अनिवार्य होगा। तभी यह कानून का रूप ले पाएगा। राज्यों का रुख देखते हुए उम्मीद है कि वहां कोई अड़चन नहीं आएगी।
मोदी सरकार इस बिल को इसी सत्र में पारित कराना चाहती है क्योंकि उसका इरादा इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को 1 अप्रैल, 2016 से लागू करने का है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा और विपक्षी दलों द्वारा राज्यसभा में कोई अड़चन पैदा नहीं की गई तो देश में अगले साल तक एक नईकर व्यवस्था लागू हो जाएगी। राज्यों की कुछ आपत्तियों के कारण यह बिल करीब एक दशक तक लटका रहा, लेकिन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राजनीतिक कौशल दिखाते हुए उनकी सभी आशंकाओं को दूर कर दिया है।
यूपीए सरकार इस पर सहमति बनाने में नाकाम रही थी। राज्यों को बिक्री कर को लेकर एक बड़ी चिंता थी। कई राज्यों को लग रहा था कि इस नई कर व्यवस्था के लागू होने से उनकी करों द्वारा होने वाली आय कम हो जाएगी। दरअसल, राज्यों की आय का मुख्य स्रोत ही कईतरह के अप्रत्यक्ष कर हैं। इसीलिए इसमें वे बाधा पहुंचा रहे थे, लेकिन वित्तमंत्री ने उनकी हानि की भरपाईका न केवल आश्वसन दिया बल्कि बिल में भी प्रावधान कर दिया है। पेट्रोलियम और अल्कोहलिक पदार्थों को लेकर भी तार्किक रास्ता अपनाया गया है। जीएसटी को देश की कर प्रणाली में एक बड़ा सुधार माना जाएगा।
इसके लागू होने से पूरा देश एक बाजार में तब्दील हो जाएगा। केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर आदि केंद्र के स्तर पर लगने वाले सभी अप्रत्यक्ष कर और राज्यों के मूल्य वर्धित कर यानी वैट, मनोरंजन कर, चुंगी और खरीद कर जैसे दर्जनों कर समाप्त हो जाएंगे। और पूरे देश में एक ही दर से जीएसटी लागू होगा। इसके तहत यह अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे देश में 12 से 16 फीसदी की कर की दर होगी जिससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कमी आने की भी उम्मीद है।
अभी केंद्र सरकार के अलावा सभी राज्य अलग-अलग तरीके से कर वसूलते हैं। जाहिर है, भारतीय बाजार में एकरूपता नहीं होने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें एक राज्य में कुछ और तो दूसरे राज्य में कुछ और होती हैं। जाहिर है, इससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को ही अपने-अपने स्तरों पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
जीएसटी कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके लागू होने से देश की जीडीपी में 1 से 2 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। इससे कर चोरी कम होगी और कलेक्शन भी बढ़ेगा। माना जा रहा है कि जीएसटी आने के बाद कर का ढांचा पारदर्शी होगा और असमानता नहीं होगी। काफी हद तक कर विवाद कम होंगे। भारत जैसे देश के लिए आसान कर प्रणाली की दरकार भी है क्योंकि उलझी हुई व्यवस्थाओं के साथ समावेशी विकास की कल्पना बेमानी है।
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