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बदले राजनीतिक माहौल में सुधर रही अर्थव्यवस्था

वर्ष 2011-12 में अक्टूबर-दिसंबर में अंतिम बार यह 6 फीसदी रही थी। ढाई साल बाद देश की विकास दर पांच फीसदी के ऊपर पहुंची है।

बदले राजनीतिक माहौल में सुधर रही अर्थव्यवस्था
केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी) 5.7 फीसदी रही। जनवरी-मार्च तिमाही में यह 4.6 फीसदी थी। वर्ष 2011-12 में अक्टूबर-दिसंबर में अंतिम बार यह 6 फीसदी रही थी। इस प्रकार ढाई साल बाद देश की विकास दर पांच फीसदी के ऊपर पहुंची है। तो क्या अब माना जाए कि लंबी सुस्ती के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ने लगी है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश के सामने जो कठिन दौर था वह गुजर चुका है। हमने स्थिरता हासिल की है। हम अब रनवे पर हैं और बहुत जल्द ही फिर नई ऊंचाइयों की तरफ चल पड़ेंगे। हाल ही में केंद्र की नई एनडीए सरकार ने सत्ता में सौ दिन पूरे किए हैं। हालांकि पूर्व की यूपीए सरकार में वित्तमंत्री रहे पी चिदंबरम इस बढ़त का श्रेय अपनी पार्टी को भी देने की मांग कर रहे हैं पर वे क्यों भूल रहे हैं कि उन्हीं की सरकार की नीतियों के कारण मंदी जैसे हालात पैदा हुए। विकास दर लगातार दो वर्ष तक पांच फीसदी के नीचे बनी रही व महंगाई चरम पर पहुंच गई। उन्हें याद रखनी चाहिए कि चुनावों के दौरान ही सत्ता परिवर्तन की आहट मिलने लगी थी। तभी से देश में एक सकारात्मक माहौल बनने लगा था और सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार द्वारा उठाए गए सुधारवादी कदमों ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। केंद्र में तीन दशक बाद किसी सरकार को स्पष्ट बहुमत मिला है, जिससे तेजी से नीतिगत फैसले लेने आसान हुए हैं। सौ दिनों में मोदी सरकार ने जो कदम उठाए हैं उसमें स्पष्टता भी रही है। निराशा का माहौल खत्म होने से निवेशकों में पैसा डूबने का भय खत्म हुआ है। लिहाजा विदेशी निवेश बढ़ रहा है। शेयर बाजार में तेजी है। मोदी सरकार बनने के बाद बीएसई और निफ्टी करीब दस फीसदी तक बढ़ चुके हैं। सरकार के विभिन्न मंत्रालय और नौकरशाही भी अब काम करती हुई दिख है। उपभोक्ताओं और निवेशकों में आशा का संचार हुआ है। एनडीए सरकार ने कुछ बड़े फैसले लिए हैं। मसलन रक्षा क्षेत्र व बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी विदेशी निवेश की मंजूरी दी गई है और रेलवे को भी विदेशी निवेशकों के लिए खोल दिया गया है। अब विदेशी निवेशक ढांचागत विकास में सौ फीसदी पूंजी लगा सकते हैं। रियल्टी और टाउनशिप प्रोजेक्ट्स में एफडीआई को सरल बनाया गया है। मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने के उपाय किए गए हैं। और कर विवादों को दूर करने के लिए खास व्यवस्था बनाने पर काम हो रहा है। यही वजह है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऋणत्मक 1.2 फीसदी से बढ़कर 3.5 फीसदी, खनन में ऋणात्मक 3.9 से बढ़कर 2.1 फीसदी, बिजली व गैस में 3.8 फीसदी से बढ़कर 10.2 फीसदी और संरचना में 1.1 फीसदी से बढ़कर 4.8 फीसदी की वृद्धि रिकॉर्ड की गई। वहीं अब सरकार के एजेंडे में सरकारी क्षेत्रों में विनिवेश की योजना व गुड्स एंड सर्विस टैक्स को जल्द लागू करना, संसद के शीतकालीन सत्र में बीमा विधेयक को पारित करवाना और सब्सिडी को तर्क संगत बनाना है। हालांकि इन सबके बीच मानसून की कमी से देश में सूखे जैसे हालात हैं, लिहाजा कृषि सेक्टर केंद्र सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। कृषि में और गिरावट हुई तो महंगाई को काबू में लाना कठिन होगा। इस प्रकार विकास दर भी प्रभावित हो सकती है।
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