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चिंतन: भ्रष्टाचार के स्त्रोतों पर नकेल बड़ी उपलब्धि

बड़े सुधारों के लिए सरकार की नीतियों में स्पष्टता, प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, नियम-कानूनों में चुस्ती बहुत जरूरी है।

चिंतन: भ्रष्टाचार के स्त्रोतों पर नकेल बड़ी उपलब्धि

मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर आयोजित जश्न की कांग्रेस बेशक जमकर आलोचना कर रही हो, लेकिन हर सरकार को अपनी उपलब्धियां जनता को बताने का हक है। मोदी सरकार पहली बार ऐसा काम नहीं कर रही है, बल्कि इससे पहले की सरकारों ने भी अपनी उपलब्धियों का बखान किया है। कांग्रेस भी पीछे नहीं रही है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो साल की सरकार की खास बात यह है कि इस छोटे से कार्यकाल में देश में भ्रष्टाचार के बड़े लीकेज पर ताला लगा है। पहली बार किसी सरकार ने छोटे-छोटे प्रयासों से भ्रष्टाचार के बड़े स्रोतों को बंजर किया है।

इस सरकार ने 36 हजार करोड़ के सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार को खत्म करने में सफलता पाई है। यह कोई छोटी बात नहीं है। कांग्रेस शासन में रसोई गैस वितरण में कितना बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा था, यह किसी से छिपा नहीं है। उस समय सरकार सब्सिडी सीधे कंपनियों को देती थी, जिसके चलते करोड़ों फर्जी गैस कनेक्शन थे, लेकिन मोदी सरकार ने डीबीटी स्कीम व आधार के जरिये सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में देकर सरकारी खाजाने का करीब 15 हजार करोड़ सलाना बचाया है। दो साल में 1.62 करोड़फर्जी कनेक्शन रद किए गए।

एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की पीएम की स्वैच्छिक अपील के चलते करीब 1.13 करोड़ लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी। ऐसे ही मोदी सरकार ने निचले वर्ग की नौकरियों में इंटरव्यू खत्म कर भ्रष्टाचार को रोका है। सेल्फ सत्यापन लागू होने से अफसरशाही पर लगाम लगी है। ब्लैक मनी पर अंकुश के लिए कई प्रयास किए गए हैं।

500 शहरों में 70 रुपये में एलईडी बल्ब उपलब्ध करवा कर इस सरकार ने करीब 20 हजार मेगावाट बिजली की बचत की है। ऐसे ही 12 रुपये में दो लाख का दुर्घटना बीमा, 330 रुपये में दो लाख का जीवन बीमा, अटल पेंशन योजना, मनरेगा जैसी सामाजिक सुरक्षा स्कीमों से गरीबों के जीवन में बड़े सुधार की नींव रखी है। कृषि मंडियों का राष्ट्रीय नेटवर्क, ईमंडी, फसल बीमा, स्वायल हेल्थ कार्ड जैसी योजनाओं से किसानों की दशा में सुधार लाने की कोशिश की गई है।

सरकार ने दूसरे बजट में कृषि, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सोशल सेक्टर को महत्व देकर गरीबों उन्मूलन की दिशा में ही कदम उठाया है। डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, स्वच्छता अभियान, मुद्रा बैंक, स्टार्ट अप स्कीम, गोल्ड मौद्रीकरण, नमामि गंगे, र्शमेव जयते, केसरिया क्रांति, नील क्रांति जैसी योजनाएं लागू कर सरकार ने अपनी स्पष्ट सोच व दृष्टि का परिचय दिया है। मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल को देखें तो मार्गेट थैचर स्टाइल के भारी भरकम सुधार कम नजर आते हैं, लेकिन हर क्षेत्र में सुधारों की नई सुबह जरूर दिखती है।

दरअसल, बड़े सुधारों के लिए सरकार की नीतियों में स्पष्टता, प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, नियम-कानूनों में चुस्ती बहुत जरूरी है। इससे भ्रष्टाचार के स्रोत नहीं पनपते हैं। इसके नहीं रहने से बड़े सुधार यथोचित परिणाम नहीं देते हैं। कांग्रेस सरकार की यही बड़ी नाकामी रही। बड़े सुधार किए, लेकिन देश की व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं ला पाई। वह भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा पाई। उल्टे कांग्रेस सरकार में 2जी, कोल ब्लॉक, आदर्श सोसायटी, कॉमनवेल्थ जैसे बड़े घोटाले हुए। भ्रष्टाचार कांग्रेस का कल्चर बन गया था और इसके चलते ही उसकी सरकार गई। मोदी सरकार इस मामले में अभी तक निष्कलंक है।

हालांकि अब अगले तीन साल में एनडीए सरकार को प्रशासनिक, पुलिस, ज्यूडिशियल समेत बड़े आर्थिक सुधारों पर जोर देना होगा। बहुत बुरी स्थिति में रहने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई जापान के चिड़ियाघर की हथिनी की मौत हो गई है। हनाको नाम की 69 साल की इस हथिनी को जापान की सबसे बूढ़ी हथनियों में शुमार किया जाता था। जब वह दो साल की थी तभी थाइलैंड ने उसे जापान को उपहार में दे दिया था।

इसके रख रखाव में सुधार के लिए पिछले साल एक याचिका दायर की गई थी। लेकिन हनाको तब तक इतनी बूढ़ी हो चुकी थी कि उसे वापस थाइलैंड नहीं भेजा जा सकता था। टोक्यो के इनोकाशिरा पार्क जू के प्रवक्ता ने बताया कि गुरुवार की सुबह हनाको जमीन पर पाई गई। जब उसे उठाने की कोशिश की गई तो वह उठ नहीं पाई। दोपहर में उसकी मौत हो गई। हनाको चिड़ियाघर में सबके आकर्षण का केंद्र थी। पर जंगल में पैदा होने वाली इस हथनी की जिंदगी पिंजड़े और मामूली हरियाली में बीती।

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