Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

काला धन के खिलाफ सरकार की बड़ी पहल

पूर्व में यह खबर आई थी कि 800 से अधिक भारतीयों का कालाधन विदेशों में हैं।

काला धन के खिलाफ सरकार की बड़ी पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने सत्ता में आने के एक दिन बाद ही कालेधन की जांच को लेकर विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर साफ कर दिया था कि वह इस मुद्दे के प्रति कितनी गंभीर है। उसके पांच महीने बाद अब विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वालों के नाम उजागर कर अपनी मंशा भी साफ कर दी है कि वह देश का पैसा चोरी करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शेगी। जिन तीन नामों का खुलासा किया है, वे हैं, गोवा के खनन कारोबारी राधा एस टिम्बलू, राजकोट के कारोबारी पंकज चमनलाल लोढिया और डाबर समूह के प्रदीप बर्मन। हालांकि नाम सामने आने के बाद बर्मन ने सफाई दी है कि उनका खाता तब खुला था जब वे एनआरआई थे और खाता खुलवाने के लिए वैधानिक इजाजत ली गई थी। वहीं पंकज लोढिया ने अपने नाम पर कोई स्विस खाता होने से ही इंकार कर दिया है।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा हैकि इन तीनों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। जिसके बाद टैक्स चोरी कर विदेशी बैंकों में गोपनीय तरीके से पैसे रखने के मामले में जांच शुरू हो गई है। अब इन तीनों को यह साबित करना होगा कि विदेशी बैंकों में उन्होंने जो पैसा रखा है, वह काला धन नहीं है और इस मामले में आरबीआई के दिशानिर्देशों की अवहेलना नहीं की गई है। केंद्र सरकार के अनुसार जैसे-जैसे लोग जांच के दायरे में आते जाएंगे वह और नामों का खुलासा सुप्रीम कोर्ट के सामने करती जाएगी। यह ठीक भी है, क्योंकि किसी विदेशी बैंक में खाता खोलना अवैध नहीं है। नियमों के मुताबिक आरबीआई एक शख्स को एक साल में विदेशी खाते में सवा लाख डॉलर रुपये भेजने की इजाजत देता है। ऐसे में यह स्वाभाविक हैकि कई लोगों ने वैध तरीकों से खाता खोला हो, लिहाजा नामों को सार्वजनिक करने से पूर्व सरकार खातों के बारे में आश्वस्त हो जाना चाहती है कि वाकई में उनमें में रखा पैसा चोरी का है। बिना ठोस साक्ष्य के नामों का खुलासा करना निजता के अधिकार का उल्लंघन का मामला बन सकता है।

पूर्व में यह खबर आई थी कि 800 से अधिक भारतीयों का कालाधन विदेशों में हैं। कुछ दिनों पहले वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार 136 लोगों का नाम कालाधन मामले में सार्वजनिक कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि पूर्व के कांग्रेस सरकार द्वारा किए समझौते इन नामों को उजागर करने में बाधक बन रहे हैं जिसके तहत नाम तब तक सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे जब तक उनके खिलाफ वित्तीय कानूनों के तहत अनियमितता की जांच शुरू नहीं हो जाती। इससे पहले नामों का खुलासा करने से द्विपक्षीय समझौते की शर्तों का उल्लंघन होगा। लिहाजा दूसरे देश कालेधन की सूचना साझा करने से इनकार कर देंगे। इसके बाद देश की सियासत गरमा गई थी। विपक्षी दल मोदी सरकार पर आरोप लगाने लगे थे कि वह काला धन रखने वालों को बचाना चाहती है।

अब केंद्र सरकार ने नामों को उजागर करने की शुरुआत कर जता दिया है कि वह कालेधन के प्रति गंभीर है। सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार द्वारा इसके प्रति काफी सक्रियता दिखाई गई है। यही वजह हैकि अमेरिका समेत दूसरे देश कुछ महत्वपूर्ण दोहरे कराधान बचाव समझौते करने में रुचि दिखा रहे हैं। इन संधियों के माध्यम से विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन से जुड़ी सूचनाओं के स्रोत तक पहुंचना आसान हो जाएगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में सभी नामों से परदा उठने के साथ ही कालेधन काभारत वापसी का रास्ता भी साफ होगा।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर-

Next Story
Top