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सड़क हादसों में तबाह होती कीमती जिंदगियां

वे 40 साल से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े थे और 34 साल से सार्वजनिक जीवन में थे।

सड़क हादसों में तबाह होती कीमती जिंदगियां
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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और महाराष्ट्र बीजेपी के दिग्गज नेता गोपीनाथ मुंडे का सोमवार को नई दिल्ली में सड़क हादसे में निधन हो गया। गोपीनाथ ने आठ दिन पहले ही नवगठित नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली थी। वे 40 साल से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े थे और 34 साल से सार्वजनिक जीवन में थे। यह सर्वविदित हैकि यदि व्यक्ति अपनी औसत आयु जी कर प्राण त्यागता है तो दुख कम होता है, लेकिन जब व्यक्ति किसी दुर्घटना का शिकार होकर, दूसरों की गलतियों के कारण, काल का ग्रास बनता है तो इससे न केवल एक परिवार बल्कि कई-कई परिवार बर्बाद और तबाह हो जाते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में हर वर्ष औसतन 4.5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं जिसमें से दो लाख सड़क दुर्घटनाएं गाड़ियों की तेज रफ्तार की वजह से होती हैं। इसमें करीब 1.2 लाख लोग काल का ग्रास बन जाते हैं और लगभग पांच लाख लोग अपंग हो जाते हैं। यदि औसत निकालें तो गत वर्ष प्रतिदिन 381 लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में दम तोड़ा है। देश में यातायात को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए मोटरयान अधिनियम-1988 और केंद्रीय मोटरयान अधिनियम-1989 बनाया गया है, परंतु आज ये कानून दुर्घटनाओं को रोकने में कारगार साबित नहीं हो पा रहे हैं। दुर्घटना करने वाले व्यक्ति को दूसरे दिन ही जमानत मिल जाती है और मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहता है। पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को क्षतिपूर्ति मिल जाती है। ऐसे लचर कानून एवं नियम भविष्य में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में असफल रहे हैं। यही वजह हैकि सड़क दुर्घटनाओं में विश्व में सबसे ज्यादा लोग भारत में ही मरते हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। मौजूदा कानून का भी भ्रष्टाचार और लचर तंत्र के कारण पालन नहीं पा रहा है। कानून से बेखौफ हो कर वाहन चालक किस तरह ट्रैफिक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हैं यह आए दिन देखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं, फिर भी वैसे जरूरी प्रावधान अभी तक लागू नहीं हुए हैं जिससे कि दोषी को कठोर दंड मिले ताकि दूसरे लोगों को भी इससे सबक मिल सके। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1947 से आतंकवादी हिंसा में मारे गए लोगों की कुल संख्या लगभग एक लाख है, लेकिन भारत में ड्राइवर प्रतिवर्ष उनसे कहीं अधिक लोगों को मौत के घाट उतार देते हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरे संसार में सड़क हादसे में प्रतिवर्ष 13 लाख लोग मारे जाते हैं और यदि सड़क सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह संख्या 2020 तक 19 लाख तक पहुंच सकती है। अधिकांश हादसों की वजह चालक की लापरवाही या नियमों की अनदेखी होती है। लिहाजा आज समय की मांग को देखते हुए कानून को कठोर बनाना चाहिए ताकि सड़क दुर्घटनाओं में गलत तरीके से गाड़ी चलाकर दूसरों की जान को खतरे में डालने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जा सके। और गोपीनाथ मुंडे जैसे कद्दावर नेताओं सहित लाखों लोगों को असमय कालग्रस्त होने से बचाया जा सके।
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