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चौबीस साल बाद जर्मनी फिर विश्व चैंपियन

दुनिया इस बार रोनाल्डो का जादू भी बहुत नहीं देख सकी, क्योंकि ग्रुप मैच में ही पुर्तगाल को बाहर होना पड़ा।

चौबीस साल बाद जर्मनी फिर विश्व चैंपियन
फुटबॉल विश्वकप का सफर र्जमनी की जीत के साथ खत्म हो गया। र्जमनी की जीत ने साबित कर दिया है कि कोई भी टीम तभी सफल हो पाती है जब उसके सभी सदस्य एक दूसरे से तालमेल बैठाते हुए अपना सौ फीसदी योगदान देते हैं। टीम किसी एक सदस्य के प्रदर्शन से हमेशा सफल नहीं होती। रविवार रात को हुए फीफा विश्वकप के खिताबी मुकाबले में र्जमनी और अज्रेंटीना की टीमों में यही बारीक अंतर था कि जहां र्जमनी के खिलाड़ी एक टीम की तरह खेले, वहीं अज्रेंटीना की टीम अपने स्टार खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी पर ही निर्भर रही। मेस्सी ने ही अज्रेंटीना को फाइनल तक पहुंचाया था पर र्जमनी की टीम इस विश्व कप में सबसे मुकम्मल टीम के रूप में उभरी है। र्जमनीके तगड़े डिफेंस का कमाल यह रहा कि उसके खिलाफ सिर्फ चार गोल हुए जबकि उसके स्ट्राइकर ने 18 गोल दागे, जो कि इस टूर्नामेंट में एक टीम की ओर से किए गए सबसे ज्यादा गोल हैं। यह र्जमनी की चौथी जीत है। 24 साल पहले 1990 में इटली में हुए विश्व कप में र्जमनी ने अर्जेंटीना की टीम को ही हरा कर तीसरी बार यह खिताब जीता था। उसने पहली बार 1954 में हंगरी को और दूसरी बार 1974 में हॉलैंड को हरा कर इस पर कब्जा जमाया था। विश्वकप के एक महीने के सफर में 32 टीमों ने हिस्सा लिया था और 64 मैच खेले गए थे।
ब्राजील और क्रोएशिया के बीच हुए उद्घाटन मैच और फाइनल तक के सफर में कई उलटफेर हुए। कई नए सितारे उभरे और खेल की पवित्रता कई बार शर्मसार भी हुई। इस विश्व कप में गोल की सटीकता का पता लगाने के लिए पहली बार गोल लाइन तकनीक का भी प्रयोग हुआ। गत चैंपियन स्पेन की टीम को जिस तरीके से पहले ही मैच में नीदरलैंड ने रौंदा, उससे स्पेन की टीम उबर नहीं सकी और पहले राउंड में ही बाहर हो गई। इसे एक युग का अंत होना कहा गया। स्पेन के साथ उसके छोटे-छोटे पास वाली टिकी-टाका तकनीक का भविष्य भी अंधकारमय हो गया। वहीं सेमीफाइनल में ब्राजील की र्जमनी के हाथों 7-1 से हार फुटबॉल की दुनिया में सबसे बड़ी घटना मानी गई, क्योंकि यह ब्राजील की अब तक की सबसे बड़ी हार है। ब्राजील की टीम भी दो खिलाड़ियों पर निर्भर रही, स्ट्राइकर नेमार और डिफेंडर थियागो सिल्वा। पूरी टीम में एकजुटता का अभाव दिखा। यही वजह रही कि इन दोनों खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में ब्राजील तीसरा स्थान भी नहीं बचा पाया।
दुनिया इस बार रोनाल्डो का जादू भी बहुत नहीं देख सकी, क्योंकि ग्रुप मैच में ही पुर्तगाल को बाहर होना पड़ा। इटली और इंग्लैंड की मजबूत टीम भी उलटफेर के कारण बाहर हो गई थी। माना जाता है कि फुटबॉल एक खेल न होकर जुनून है। यही वजह है कि इसके प्रशंसक कई बार दीवानगी की हद तक पहुंच जाते हैं। इसी दीवानगी में इसका आकर्षण भी छिपा है। दरअसल, यह सभी खेलों का राज भी है। क्योंकि यह हर तरह के बंधनों को तोड़ देता है। क्या अमीर-गरीब, गोरे-काले, यहूदी-ईसाई, हिंदू-मुसलमान का भेद यहां मिट जाता है। इसके दीवानों के लिए फुटबॉल की परिभाषा भी यही है। पहली बार 1930 में उरुग्वे में इसकी शुरुआत हुई थी, तब से लेकर प्रत्येक चार वर्ष बाद आयोजित होने वाले इस खेल उत्साव का यह 20वां संस्करण था। जिसके गवाह दुनिया के करोड़ों लोग बने। कुल मिलाकर इस महाप्रतियोगिता में वही टीम मंजिल तक पहुंची जिसमें दृढ़ संकल्प, टीम भावना, धैर्य व सही समय पर सही फैसला लेने का माद्दा था। बेशक, यह सब र्जमनी की टीम में था।
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