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बजट से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

गरीब परिवार को एक लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा बड़ा ऐलान है।

बजट से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर
आम बजट को लेकर जितनी भी आशंकाएं जताई जा रही थीं, सभी निर्मूल साबित हुईं। वित्त मंत्री ने संतुलित बजट पेश कर अच्छे दिनों की ओर जोरदार कदम बढ़ाया है। इसमें कृषि, उद्योग व सामाजिक क्षेत्र के समग्र विकास का रोडमैप पेश किया गया है। किसानों और गरीबी उन्मूलन पर खास फोकस किया गया है। आजादी के बाद पहली बार इस तरह का बजट पेश किया गया है, जिसमें 'सबके विकास' की अवधारणा है। नहीं तो 1991 में उदारीकरण के बाद से अधिकांश बजट कॉरपोरेट सेक्टर को ही सर्मपित रहे हैं। इस दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था हाशिये पर चली गई थी। जबकि गरीबी और किसान की बिगड़ी दशा देश की बड़ी समस्या रही है। इस बजट में इस ओर पुख्ता तरीके से ध्यान दिया गया है। इसमें किसानों की माली हालत सुधारने, कृषि क्षेत्र को विकास के केंद्र में लाने, गरीबी और निम्न मध्य आय वर्ग के लोगों को समृद्ध बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही इसमें छोटे उद्यमियों को बड़ी राहत दी गई है। बड़े उद्योगों पर भी कोई बोझ नहीं डाला गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया गया है। भारत की आत्मा गांवों में बसती है, इसलिए गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किए बिना देश का पूर्ण विकास संभव नहीं है। इस बजट में वित्त मंत्री ने सड़क, रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दो लाख करोड़ से अधिक का आवंटन किया गया है, पंचायतों और नगर पालिकाओं के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये व ग्रामीण विकास के लिए 87,000 करोड़ दिया गया है। 2018 तक हर गांवों में बिजली का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह 2022 तक किसानों की आय दोगुणा करने का वादा किया गया है। किसानों को सस्ती दर पर कर्ज मुहैया कराने के लिए 9 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। कृषि क्षेत्र के लिए 35 हजार करोड़ से ज्यादा का आवंटन है तो, सिंचाई के लिए बीस हजार करोड़ का। भारतीय फसलों के बाजार में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है। मनरेगा को सिंचाई से जोड़ा गया है। गरीब परिवार को एक लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा बड़ा ऐलान है। वो इसलिए कि गरीबों का स्वास्थ्य पर अधिक खर्च होने से वह लगातार गरीबी के दुष्चक्र में फंसे रहते हैं। वित्त वर्ष 216-17 में डेढ़ करोड़ बीपीएल महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन दिया जाएगा। इस बजट की खास बात है कि इसमें सरकारी खर्च बढ़ाने पर जोर दिया गया है। डा. भीमरराव अंबेडकर भी सरकारी खर्च बढ़ाने के पक्षधर थे। उदारीकरण के बाद अमीर व गरीब के बीच बढ़ती खाई से सरकार का चिंतित होना लाजिमी है। गांव, किसान, गरीब, सड़क, बिजली, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य व स्किल पर खर्च बढ़ने से नियो मिडिल क्लास उपभेक्ताओं का बड़ा वर्ग तैयार होगा और हमारा बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, जिससे अंतत: उद्योग जगत को बड़ा लाभ मिलेगा। बस बजट घोषणा सही तरीके से अमल में आए।
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