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जी-20 के मंच से आर्थिक सुधार का आह्वान

नरेंद्र मोदी ने हाल ही पाई-पाई कालाधन वापस लाने की बात कही थी।

जी-20 के मंच से आर्थिक सुधार का आह्वान

ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में संपन्न हुए दो दिवसीय समूह-20 देशों का शिखर सम्मेलन भारत के नजरिये से कई मायने में अहम रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कालेधन के बढ़ते साम्राज्य और देशी-विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा की जाने वाली कर चोरी को जोर शोर से उठाने के बाद ये दोनों मुद्दे जी-20 के घोषणापत्र में शामिल किए गए। यह पहली बार देखा गया है कि भारत के किसी प्रधानमंत्री ने इतने बड़े और प्रभावी मंच पर कालेधन के मुद्दे को मजबूती से उठाया हो। जी-20 में दुनिया के प्रमुख देश शामिल हैं। मोदी सरकार की मंशा हैकि इनके माध्यम से दुनिया के टैक्स हैवेन माने जाने वाले देशों पर दबाव बनाया जाए। दुनिया के करीब 76 देशों में भारतीयों का कालाधन छिपे होने का अनुमान है। जिस तरह से इन सभी देशों ने इस पर भारत के रुख का समर्थन किया है, उससे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भारत को दूसरे देशों से सूचनाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। देश में कालाधन एक बड़ा मुद्दा है।

नरेंद्र मोदी ने हाल ही पाई-पाई कालाधन वापस लाने की बात कही थी। कालाधन से विश्व जगत को भी खतरा है। इसके रोकथाम के लिए सभी देश के नेताओं को एक साथ मिलकर काम करना होगा और एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा करने के लिए व्यवस्था बनानी होगी। प्रधानमंत्री ने एक और बड़ी बात के जरिए दुनिया को संदेश देने का काम किया है वह यह कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुधारों की जो रफ्तार थम गई है, उसमें तेजी लाने की जरूरत है। उन्होंने ठीक कहा है कि जब सुधार होते हैं तो उसका कई स्तरों पर विरोध होता है। उस पर राजनीति भी होती है। देश में भी गाहे बगाहे ऐसे दृश्य सामने आते रहते हैं। जब भी कोई सुधार होता है तो लोग उसे बोझ और सरकारी कार्यक्रम के तौर पर देखने लगते हैं।

दरअसल जनता को साथ नहीं लेने की वजह से ऐसी समस्या खड़ी होती है। उनका यह सुझाव अहम है कि सुधार जन केंद्रित और जनता को साथ लेकर होने चाहिए। आज देश में भी कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है। मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से उन पर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य के बाद माना जा रहा है कि 24 नवंबर से शुरू होने जा रहे संसद के शीतसत्र में भाजपा की अगुआई वाली एनडीए सरकार लंबित आर्थिक सुधारों पर कुछ बड़े फैसले ले सकती है। ऐसे में लेबर लॉ, भूमि अधिग्रहण, बीमा बिल और गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स में अहम सुधार होने की उम्मीद की जा रही है।

आज देश में बड़े नीतिगत और प्रशासनिक सुधार जरूरी भी हैं, क्योंकि इससे देश में रोजगार पैदा करने, निवेश बढ़ाने और उद्योग धंधे लगाने की राह आसान होगी। जी-20 देशों का शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब विश्व अर्थव्यवस्था ठहराव की स्थिति में है। समूह में शामिल देशों ने दावा किया है कि अगले पांच वर्षों में वे वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2,000 अरब डॉलर जोड़ेंगे। इससे वैश्विक आर्थिक वृद्धि में दो प्रतिशत विस्तार होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, लेकिन इसके लिए कुछ बड़े सुधार जरूरी होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने तो इसकी वकालत कर अपनी सरकार की इच्छा प्रकट कर दी है।

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