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चिंतन: संयुक्त राष्ट्र में सुधार की बढ़ी उम्मीदें

ब्राजील दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा देश है। इसके बावजूद इन देशों का सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

चिंतन: संयुक्त राष्ट्र में सुधार की बढ़ी उम्मीदें
संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत के स्थाई सदस्यता हासिल करने की कोशिशों को शनिवार को उस समय एक बड़ी सफलता मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान जी-4 (भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील) देशों ने एकजुट हो कर एक मंच से सुरक्षा परिषद में निश्चित समय सीमा में सुधार की मजबूती से मांग की। भारत के नजरिए से यह एक बड़ी उपलब्धि है। इससे संयुक्त राष्ट्र पर निश्चित रूप से दबाव बढ़ेगा। इससे पहले प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 70वें अधिवेशन को संबोधित करते हुए जोरदार ढंग से बताया कि भारत जैसे देशों को सुरक्षा परिषद में शामिल करना क्यों जरूरी हो गया है। देखा जाए तो मौजूदा संयुक्त राष्ट्र बीती एक सदी की व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि आज दुनिया नई तरह की समस्याओं से जूझ रही है। अर्थात जिस समय संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ, उस वक्त की तुलना में आज हम अलग दुनिया में रह रहे हैं। दुनिया के देशों की संख्या चार गुना बढ़ गई है।
शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले कारक और जटिल हो गए हैं। जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद के मोर्चे पर नई चिंताएं पैदा हुई हैं, जबकि साइबर व अंतरिक्ष ने नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। पहले की अपेक्षा दुनिया की आबादी भी बढ़ी है। शांति और रोजगार की तलाश में पलायन एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा महासभा में ही निश्चित समय सीमा के भीतर सुरक्षा परिषद में सुधार कर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों, वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े इंजनों और सभी बड़े महाद्वीपों की आवाजों को शामिल किया जाना चाहिए। इसमें कोईदो राय नहीं कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने संयुक्त राष्ट्र की शुरुआती संरचना भेदभाव पूर्ण थी।
कुछ देशों ने अपने स्वार्थ के कारण इसे पंगु बनाकर रख दिया है जिसके कारण इसकी पहचान नखदंतविहीन संगठन के रूप में बन गई है। जिसके चलते आज विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र अप्रभावी नजर आ रहा है। ऐसे में भारत जैसे देशों को इसमें जगह देने से संयुक्त राष्ट्र के उन उद्देश्यों को साकार करना आसान हो जाएगा जिसकी कल्पना इसकी स्थापना के समय की गई थी। जी-4 देश संयुक्त राष्ट्र की संरचना में सुधार के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ-साथ आज तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है।
जापान व जर्मनी भी बड़ी आर्थिक ताकत हैं। जर्मनी यूरोप का शक्तिशाली देश है। वहीं ब्राजील दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा देश है। इसके बावजूद इन देशों का सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग एक फिर जोर पकड़ी है। जिसे देखते हुए गत दिनों ही संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने सहमति से सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार पर चर्चा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस मुहिम को दुनिया के देशों का जिस तरह से सर्मथन मिल रहा है उससे इस बात की उम्मीद बढ़ गई है कि सुरक्षा परिषद में जल्दी ही अपेक्षित सुधार हो सकेगा और भारत उसमें जगह बनाने में सफल हो सकेगा।
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