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संभावनाओं के नए द्वार खुलने की उम्मीद

प्रधानमंत्री मोदी सिडनी ओलंपिक पार्क में 15 हजार भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करेंगे।

संभावनाओं के नए द्वार खुलने की उम्मीद
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मंगलवार से आरंभ हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और फिजी की यात्रा कई मायने में अहम रहने वाली है। इस यात्रा की अवधि दस दिनों की होगी। तीन देशों की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 24 बैठकों में शामिल होंगे। वहीं वे अमेरिका, रूस, चीन, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा समेत करीब 40 देशों के राष्ट्र प्रमुखों से भी मिलेंगे। अर्थात एशिया, अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप और प्रशांत क्षेत्र के करीब सभी बड़े नेताओं के साथ उनकी मुलाकात होनी है।

यात्रा से पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी कोशिश भारत के विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा विश्व सहयोग जुटाने की होगी। प्रधानमंत्री का पहला पड़ाव म्यांमार है। जहां वे 13 नवंबर तक रहेंगे। म्यांमार में मोदी को आसियान-भारत और ईस्ट एशिया समिट में हिस्सा लेना है। आसियान सदस्य देशों में ब्रुनेई, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाइलैंड, फिलीपींस और वियतनाम शामिल हैं जबकि ईस्ट एशिया समिट (ईएएस) सदस्यों में दस आसियान देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका शामिल हैं।

भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी में आशियान देशों की बड़ी भूमिका है। वहीं ईस्ट एशिया समिट बैठक विश्व के भविष्य को आकार देने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री मोदी अलग से म्यांमार के राष्ट्रपति थेन सेन से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और नेता विपक्ष आंग सान सू की से भी मुलाकात करेंगे। म्यांमार के साथ भारत की 1600 किलोमीटर से लंबी सीमा लगती है। भारत वहां कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। म्यांमार के बाद प्रधानमंत्री मोदी का अगला पड़ाव होगा ऑस्ट्रेलिया जहां वे 14-18 नवंबर तक रहेंगे। उनको जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेना है। जी-20 देश विश्व के आर्थिक उत्पादन में 85 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण फोरम है।

1986 में राजीव गांधी के बाद ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर जाने वाले मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ हमारी काफी समानता है, लेकिन हमारे राजनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक संबंधों का क्षमताओं के अनुरूप दोहन नहीं हुआ है। मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे से बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं। क्योंकि दोनों देशों के बीच अलग से द्विपक्षीय वार्ता भी होनी है, जिसमें पर्यटन, नशीली दवाओं की रोकथाम, सांस्कृतिक सहयोग समेत कई क्षेत्रों में समझौते संभावित हैं। सितंबर में जब ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबॉट भारत आए थे तो दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर डील पर करार हुआ था। अब उसे एक नई दिशा मिलने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी सिडनी ओलंपिक पार्क में 15 हजार भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करेंगे, जिसे लेकर काफी उत्साह है। इसके अलावा वे ऑस्ट्रेलियाई संसद को भी संबोधित करेंगे। इस यात्रा से भारत ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के तीसरे पड़ाव में फिजी जाएंगे। इससे पहले 1981 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने फिजी का दौरा किया था। फिजी की करीब आधी आबादी भारतीय मूल की है। मोदी वहां प्रधानमंत्री फ्रैंक बेनिमारामा से भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। उनका मकसद दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाना है। इस प्रकार यह दौरा दुनिया को भारत की क्षमताओं से अवगत करने वाला साबित हो सकता है।

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