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क्रिकेट के साफ-सुथरा होने की उम्मीद

सट्टेबाजी मामले की जांच पूरी कर चुकी मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह का कड़ा रुख अख्तियार किया है

क्रिकेट के साफ-सुथरा होने की उम्मीद

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई द्वारा आरंभ किए गए आईपीएल के छठवें सीजन में सामने आए स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी मामले की जांच पूरी कर चुकी मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह का कड़ा रुख अख्तियार किया है उससे खेल प्रेमियों को एक उम्मीद जगी हैकि आने वाले दिनों में क्रिकेट से गंदगी दूर हो सकेगी और उन्हें मैदान पर साफ-सुथरा क्रिकेट देखने को मिलेगा।

बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई से साफ कह दिया कि अब इस मामले में आगे कोई जांच नहीं होगी और उसेमुद्गल कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई करनी होगी। सुप्रीम कोर्टने यहां तक कहा है कि एन श्रीनिवासन के हितों के टकराव व उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन पर लगे आरोपों के मद्देनजर आईपीएल की चेन्नई सुपर किंग्स की मान्यता रद्द कर दी जानी चाहिए। अदालत ने बीसीसीआई से यह भी कहा है कि वह बोर्ड के अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से चुनाव करवाए और जांच रिपोर्ट में जिन चार अधिकारियों के नामों का जिक्र हुआ है, उन्हें चुनावों से दूर रखा जाए। यानी अब एन श्रीनिवासन के फिर से बीसीसीआई अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने की संभावना खत्म होती नजर आ रही है। गत दिनों सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में मुद्गल कमेटी ने स्पष्ट कहा है कि चेन्नई सुपर किंग्स के अधिकारी रहे गुरुनाथ मयप्पन, राजस्थान रॉयल्स के सहमालिक राजकुंद्रा और आईपीएल के सीईओ सुंदर रमन सट्टेबाजी में संलिप्त थे।

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत में क्रिकेट एक धर्म की तरह है। लोगों की भावनाएं टीमों की हार-जीत से जुड़ी हुई हैं, लेकिन यदि मैदान के बाहर ही मैच के नतीजे तय हो जाएंगे तो क्रिकेट तबाह हुए बिना नहीं रह जाएगा। जो लोग सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्त हैं वे इसके सबसे बड़े दुश्मन हैं और वे एक तरह से क्रिकेट जैसे जेंटलमैंन खेल की हत्या ही कर रहे हैं। लिहाजा दोषियों को सबक सिखाने की जरूरत है। आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के मामले में बीसीसीआई का रुख हमेशा से ही लिपापोती करने का रहा है। उसके कदम से कभी नहीं लगा कि वह दोषियों को सजा दिलाने के प्रति गंभीर है। यही वजह है कि हाल के दिनों में उसकी साख काफी गिरी है।

शुरुआत में बीसीसीआई ने इस मामले की जो जांच कराई थी उसमें इन सभी को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई जांच में इन्हें दोषी पाया गया। एन श्रीनिवासन की भी इस पूरे मामले में भूमिका काफी संदेहास्पद रही है। कुछ दिन पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष पद पर पुन: बहाल किया जाए, लेकिन अदालत ने कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें उनकी करतूतों की याद दिला कर उचित ही किया। क्योंकि एन श्रीनिवासन एक ही साथ बोर्ड अध्यक्ष होने के साथ-साथ चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक भी थे। और देश ने देखा कि वे दोषियों को बचाने के लिए इस पूरे मामले पर किस तरह परदा डालते रहे। अब सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह बीसीसीआई को फटकार लगाई है उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि वह क्रिकेट के खेल को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में गंभीरता से पहल करेगा।

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