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अब दुनिया पर मंडराता इबोला का खतरा

इससे पहले भी इबोला महामारी से सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन मौजूदा संकट बड़ा है

अब दुनिया पर मंडराता इबोला का खतरा

नई दिल्‍ली. इबोला वायरस का खौफ दुनियाभर में बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी बताया है, इसका आशय यह हैकि दुनिया में इसके वायरस के फैलने काखतरा है और इसको रोकने के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाने होंगे। इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने पोलियो और 2009 में स्वाइन फ्लू के लिए इस तरह की इमरजेंसी का ऐलान किया था। डब्ल्यूएचओ ने कहा हैकि इसकी संक्रमण क्षमता को देखते हुए यह बड़ी तेजी से दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है। लिहाजा सभी देशों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। दिसंबर 2013 में गिनी के दक्षिण पूर्व के दूर-दराज के जंगली क्षेत्रों में यह पहली बार सामने आया था, उसके बाद बड़ी तेजी से पश्चिमी अफ्रीका के तीन देशों लाइबेरिया, नाइजीरिया और सियेरा लियोना में फैल गया।

अब तक इससे 1779 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, जबकि इससे मरने वालों की संख्या एक हजार के करीब पहुंच गई है। इससे पहले भी इबोला महामारी से सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन मौजूदा संकट बड़ा है वह इसलिए कि इबोला प्रजाति का एक दूसरा घातक वायरस जायर इबोला सामने आया है। अब तक पहचान में आए पांच तरह के इबोला संक्रमण में जायर सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। इसकी चपेट में आने के बाद संक्रमित व्यक्ति के बचने की गुंजाइश बहुत कम होती है। इससे ग्रस्त व्यक्तियों के मरने की दर 90 प्रतिशत है। डॉक्टरों का कहना हैकि संक्रमण के चरम तक पहुंचने में दो दिन से लेकर तीन सप्ताह तक का वक्त लग सकता है और ऐसे में इसकी पहचान और भी मुश्किल है। आज के ग्लोबलाइजेशन के दौर में इतने दिनों में यदि कोई संक्रमित व्यक्ति दूसरे देशों की यात्रा कर लेता है तो जाहिर है, वह अपने साथ वायरस भी ले जाएगा। लिहाजा दुनिया डरी हुई है, क्योंकि किसी को भी इलाज तभी दे सकते हैं जब उसमें संक्रमण के लक्षण दिखेंगे। हालांकि एक बड़ी सच्चाई यह भी है कि वायरस नया होने के कारण मौजूदा समय में इसके इलाज के लिए कोईदवा या टीका भी नहीं है।

मनुष्यों में इसका संक्रमण संक्रमित जानवरों, जैसे- चिंपैंजी, चमगादड़ और हिरण आदि के सीधे संपर्क में आने से होता है। एक दूसरे के बीच इसका संक्रमण संक्रमित रक्त, द्रव या अंगों के मार्फत होता है। शव को छूने से भी इसका संक्रमण हो सकता है। बिना सावधानी के इलाज करने वाले चिकित्सकों को भी इससे संक्रमित होने का भारी खतरा रहता है। संक्रमित व्यक्ति के ठीक हो जाने के सात सप्ताह तक संक्रमण का खतरा बना रहता है। इबोला से पीड़ित रोगियों के शारीरिक द्रव और उनसे सीधे संपर्क से बचना चाहिए। साथ ही साझा तौलिये के इस्तेमाल से बचना चाहिए। इलाज करने वालों को दस्ताने और मास्क पहनने चाहिए और समय-समय पर हाथ धोते रहना चाहिए। इसके फैलाव को रोकने के लिए भारत को खासकर संक्रमित देशों से आने वाले लोगों की हवाईअड्डों पर गहन जांच होनी चाहिए।

क्योंकि गिनी, लाइबेरिया, सियेरा लियोना और नाइजीरिया में रहने वाले करीब 45 हजार लोग वापस आ सकते हैं। अभी नाइजीरिया से लौटे महाराष्ट्र के एक व्यक्ति में इबोला के लक्षण पाए गए हैं। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सुनिश्चित किया है कि इसकी पहचान के लिए आधुनिक तकनीक से लैस लैब और प्रमुख अस्पतालों में इलाज के लिए अलग से वार्ड बनाए गए हैं। बहरहाल, अतिरिक्‍त सावाधानी से ही बचा जा सकता है।

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