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चिंतनः डिजिटल इंडिया से बदलेगा देश का भविष्य

इंटरनेट साक्षरता के साथ इंटरनेट स्पीड भी बहुत मायने रखती है।

चिंतनः डिजिटल इंडिया से बदलेगा देश का भविष्य
डिजिटल इंडिया योजना बुधवार को विधिवत रूप से आरंभ हो गई। भारत सरकार डिजिटल इंडिया वीक मनाएगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना से रूबरू कराया जा सके। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत जैसे देश के लिए यह ऐतिहासिक कदम है। इसमें देश के भविष्य को बदलने की क्षमता है।
व्यवस्थाओं का डिजिटलाइजेशन बदलते वक्त की जरूरत है। क्योंकि यह सबको एक साथ जोड़ता है। इस योजना का उद्देश्य सभी गांव कस्बों को इंटरनेट से जोड़ना और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना है। डिजिटल इंडिया के प्लेटफॉर्म पर ई-हेल्थ, ई-बैग, ई-स्कॉलरशिप और ई-लॉकर सहित ऐसी ढ़ाई सौ से ज्यादा सेवाओं का लाभ लोगों को इंटरनेट के जरिए घर बैठे मिल सकेगा। जैसे ई-लॉकर सुविधा के तहत लोग अपने सभी जरूरी दस्तावेजों को डिजिटली स्टोर कर सकते हैं। लोगों को कहीं भी हार्ड कापी देने की जरूरत नहीं होगी। ई-बैग के जरिए किसी भी बोर्ड की किताब को छात्र कहीं से भी घर बैठे सिर्फ पढ़ ही नहीं पाएंगे, बल्कि फ्री में डाउनलोड भी कर सकेंगे। इससे उनके बस्ते का बोझ कम होगा।

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वहीं ई-हेल्थ से दूर-दराज के गांवों के लोग भी अच्छी मेडिकल सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। जाहिर है, इससे सरकारी कामकाज में भी पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा। सरकार और लोगों के बीच की भी दूरी कम होगी। दफ्तरों के चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा। देश के शहरी और दूर दराज के क्षेत्रों के लोगों को समान रूप से बिना देरी के तय समय में सेवाएं मिल सकेंगी। जिससे उनका धन व वक्त दोनों बचेंगे। इससे आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी। डिजिटल इंडिया में लोगों की जिंदगी को बदलने की क्षमता है। इससे आम आदमी का सशक्तीकरण होगा, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी खड़ी हैं। दरअसल, इसका पूरा कॉन्सेप्ट इंटरनेट पर निर्भर है, लेकिन अभी भारत के करोड़ों लोग इसकी पहुंच से दूर हैं।
इंटरनेट साक्षरता के साथ इंटरनेट स्पीड भी बहुत मायने रखती है। भारत डाउनलोड स्पीड में बहुत पीछे है। यहां डाउनलोड स्पीड दो एमबीपीएस है। वहीं दिसंबर 2019 तक देश की 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ने का लक्ष्य भी आसान नहीं है। इस सपने को हकीकत में लाने के लिए इंटरनेट की लागत सबसे अहम कारक है।
इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है, जो छोटे या मध्यम वर्ग से हैं। अभी देश में आधी आबादी को अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है तो ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ऐसा परिवार इंटरनेट का खर्च वहन कर सकता है। वहीं देश भर में फ्री वाई-फाई जोन बनाना और उसमें इंटरनेट स्पीड को मेंटेन करना भी कठिन है। देश भर में बिजली की समस्या अभी विकराल है।
गांवों में दस से बीस घंटे की बिजली कटौती होती है। अभी देश की एक तिहाई ग्रामीण आबादी के पास कंप्यूटर नहीं है। देश में साइबर सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा। अर्थात जरूरी ढांचा का विकास करना होगा।
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