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देवयानी को राहत मिलना भारत की कूटनीतिक जीत

देवयानी को वियना कन्वेंशन के तहत राजनयिक छूट प्राप्त है।

देवयानी को राहत मिलना भारत की कूटनीतिक जीत
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नई दिल्ली. अमेरिकी अदालत से भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े को राहत मिलना कूटनीतिक रूप से भारत की एक बड़ी जीत है। अदालत ने उनके खिलाफ वीजा धोखाधड़ी और घरेलू नौकरानी को कम मेहनताना देने के सभी आरोप खारिज कर दिए हैं। इसे लेकर गत वर्ष दिसंबर में उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी। अपने आदेश में अदालत ने कहा है कि जिस वक्त देवयानी खोबरागड़े पर अभियोग तय किया गया था, उस वक्त उन्हें राजनयिक संरक्षण प्राप्त था।
हालांकि यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और नए सिरे से उन पर आरोप पत्र दाखिल हो सकता है, परंतु निश्चित रूप से यह एक बड़ी राहत है। भारत की ओर से शुरू से ही यह दलील दी जा रही थी कि देवयानी को वियना कन्वेंशन के तहत राजनयिक छूट प्राप्त है, परंतु अमेरिकी अधिकारी इसे नजरअंदाज करते रहे थे। अब वहां की अदालत ने भारत के रुख का सर्मथन किया है। इस मामले में जिस तरह से उन्हें नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया गया, हथकड़ी तक पहना दी गई, उनकी गहन जांच हुई वह राजनयिक के साथ सामान्य व्यवहार नहीं था।
अमेरिकी कानूनों की आड़ लेकर जिस तरह से उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ था भारत ने उस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। भारत सरकार ने अमेरिकी राजदूत से इसकी शिकायत करने के साथ ही अमेरिका में स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी विरोध दर्ज किया था। वहीं सरकार ने देश में स्थित सभी अमेरिकी राजनयिकों के पहचान पत्र जमा करा लिए थे और यहां उनको मिलने वाली सभी छूटों को नए सिरे से परिभाषित किया गया। ये ऐसी सहूलियतें थीं जो अमेरिका भारतीय राजनयिकों को नहीं देता पर भारत में उन्हें मिल रही थीं। इसके साथ ही भारत दौरे पर आए अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल से लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने मुलाकात के कार्यक्रम रद्द कर दिए थे।
भारत की ओर से कड़े रुख की जरूरत भी थी, क्योंकि अमेरिकी अथॉरिटी और वहां का सिस्टम कानूनों का हवाला देकर लगातार भारतीय राजनयिकों और विशिष्ट व्यक्तियों के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहा है। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी तल्खी भी आई है। भारत ने जिस तरह से अपने नागरिक के सम्मान के लिए अमेरिका के सामने कड़ा रुख अपनाया उसकी सभी ने तारीफ की है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह सर्वमान्य सिद्धांत है कि कूटनीतिक रिश्ते पारस्परिक सहयोग से चलते हैं और इसका दो देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
अमेरिका को यह ध्यान रखना होगा। निश्चित रूप से यदि कहीं स्थानीय कानून का उल्लंघन हुआ है तो उसे सम्मानजनक तरीके से निपटाया जाना चाहिए, लेकिन अमेरिकी अथॉरिटी ने जिस तरह से महज आरोप के आधार पर उनके साथ एक गंभीर अपराधी की तरह व्यवहार किया, वह आपत्तिजनक था। हालांकि भारत के लिए भी यह सबक लेने वाला मामला है। उच्च पदों पर बठे लोग जो विदेशों में कार्यरत हैं उन्हें भी स्थानीय कानून के अनुसार व्यवहार करना चाहिए।
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