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रोजगार विहीन विकास से निजात मिलना जरूरी

माना जाता है कि अगर आर्थिक विकास की दर ऊंची होती है तो युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ते हैं

रोजगार विहीन विकास से निजात मिलना जरूरी
आमतौर पर माना जाता है कि अगर आर्थिक विकास की दर ऊंची होती है तो युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, लेकिन देश में ऊंची विकास दर के बावजूद बीते दशक में रोजगार के अवसर घटे हैं। दरअसल, देश की प्रतिष्ठित संस्था एसोचैम के एक अध्ययन में सामने आया है कि वर्ष 2004-05 से 2009-10 के बीच जब देश का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी प्रतिवर्ष आठ फीसदी की दर से बढ़ रही थी तब यहां करीब 50 लाख रोजगार घट गए। अध्ययन में कहा गया हैकि सर्विस सेक्टर पर अधिक ध्यान देने और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की अनदेखी की वजह से देश में नौकरी विहीन विकास के हालात पैदा हुए हैं। अर्थशास्त्र के नियम कहते हैं कि सर्विस सेक्टर पर ज्यादा ध्यान देने और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की अनदेखी से अर्थव्यवस्था की ऐसी वृद्धि होती है, जिसमें रोजगार नहीं पैदा होते। सकल घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 65 फीसदी है, लेकिन देश के 27 फीसदी र्शमिक ही इसमें कार्यरत हैं। अध्ययन में जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2001 से 2011 के बीच हर साल नौकरी तलाशने वालों की तादात 2.23 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी, जबकि उस दौरान रोजगार में महज 1.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई। आर्थिक विकास की मौजूदा तौर तरीकों की इस वजह से आलोचना होती रही है कि इससे दुनिया में आर्थिक विषमता पैदा हो रही है। अब इस खुलासे से यह पूछा जाने लगा है कि इस रोजगार विहीन आर्थिक विकास का औचित्य क्या है? विशेषज्ञों का तर्क है कि मैन्यूफैक्चरिंग में वृद्धि आय तथा रोजगार में बढ़ोतरी के लिए जरूरी है। युवाओं को सबसे ज्यादा रोजगार मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में मिलता है, लेकिन हमारे देश में पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में विकास दर बहुत कम रही है। संभवत: इसी कारण रोजगार विहीन विकास की स्थिति पैदा हुई। आज देश के सकल घरेलू उत्पाद में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का योगदान करीब 14 फीसदी के आसपास है, जो कि भारत जैसे देश के लिए जहां र्शमिकों की भरपूर उपलब्धता है, काफी कम है। इसे करीब 25 फीसदी के ऊपर ले जाने की जरूरत है। मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया कार्यक्रम यदि सफल हो जाते हैं तो रोजगार विहीन विकास के हालात काफी हद तक खत्म हो जाएंगे। मेक इन इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब या दुनिया की फैक्टरी बनाना है। केंद्र सरकार ने 25 ऐसे उद्योगों की पहचान की है जहां उत्पादन की गुंजाइश सबसे ज्यादा है। इस दिशा में देश में कारोबार के नियमों को आसान बनाने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। जिससे यहां मैन्यूफैक्चरिंग इकाई लगाने में कानूनी अड़चनों का सामना नहीं करना पड़े। इसके साथ ही स्किल इंडिया के तहत युवाओं में कौशल बढ़ाने का भी काम हो रहा है। मेक इन इंडिया देश में रोजगार के अवसर पैदा करेगा और स्किल इंडिया देश के युवाओं को रोजगार के लायक बनाएगा। देश में आज 1.3 करोड़ युवा हर वर्ष श्रम बल में शामिल हो रहे हैं। सामाजिक-आर्थिक टकराव रोकने के लिए भी इतनी बड़ी श्रम शक्ति को उत्पादक तरीके से व्यस्त रखना जरूरी है।
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