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एक और शीतयुद्ध का कारण बनता क्रीमिया

दुनिया जानती हैकि 1992 में सोवियत संघ का विघटन हो गया।

एक और शीतयुद्ध का कारण बनता क्रीमिया
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नई दिल्ली. यूक्रेन का संकट गहरा गया है। मंगलवार को जिस तरह से रूस ने तमाम देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विरोध के बावजूद यूक्रेन के एक प्रांत क्रीमिया को अपना हिस्सा बनाने की कोशिश की, वह यूक्रेन ही नहीं बल्कि समूचे विश्व जगत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतीन ने अपने इस कदम के लिए क्रीमिया में हुए जनमत संग्रह को आधार बनाया है।
सोमवार को जनमत-संग्रह के बाद क्रीमिया ने खुद को यूक्रेन से आजाद घोषित कर दिया था। जिसमें क्रीमिया के लगभग 97 फीसदी लोगों ने यूक्रेन से अलग होकर रूस का हिस्सा बनने के पक्ष में वोट किया था। अमेरिका और पश्चिमी सरकारें इस जनमत संग्रह को पहले ही खारिज कर चुकी हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में रूसी सैनिकों की मौजूदगी में यह सर्वेक्षण करवाए गए। अब क्रीमिया का संकट राजनीतिक से ज्यादा सैन्य स्तर का होता प्रतीत हो रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि यूक्रेन शीतयुद्ध की एक प्रयोगशाला बनने के कगार पर पहुंच गया है।
अमेरिका ने रूस को इसके लिए परिणाम भुगतने की धमकी दी है तो वहीं जी आठ देशों के समूह से रूस को निलंबित कर दिया गया है। रूस के इस कदम को ताकतवर देशों द्वारा कमजोर पड़ोसी देशों की सीमाओं के साथ छेड़छाड़ की संज्ञा दी जा सकती है। पूर्व में अमेरिका भी आतंकवाद के खिलाफ अपनी तथाकथित लड़ाईके नाम पर कईदेशों पर सैन्य कार्रवाई कर चुका है। यदि समय रहते ताकतवर देशों की ऐसी प्रवृत्तियों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो देखते-देखते हर तरफ उथल-पुथल मच जाएगी। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र संघ को आगे आना होगा। अभी यूक्रेन में एक कार्यवाहक सरकार है। दरअसल रूस, यूक्रेन और क्रीमिया के आपसी रिश्ते काफी उलझे रहे हैं। 1783 में रूस ने पहली बार क्रीमिया को अपने अधीन किया था। वहीं वर्ष 1921 से लेकर 1954 तक यह सोवियत संघ का हिस्सा बना रहा। एक राजनीतिक घटनाक्रम के बाद वर्ष 1954 में सोवियत सरकार ने इसे यूक्रेन को सौंप दिया। उस समय सोवियत संघ का नेतृत्व निकिता ख्रुश्चेव कर रहे थे।
दुनिया जानती हैकि 1992 में सोवियत संघ का विघटन हो गया। इस दौरान क्रीमिया ने यूक्रेन के साथ बने रहने का निर्णय किया था। वहीं यूक्रेन का उत्तर-पश्चिम क्षेत्र, जिसे कीव के नाम से जाना जाता है, यूरोप का सर्मथक माना जाता है। जबकि रूस से सटे हुए दक्षिण-पूर्वी भाग, जिसे क्रीमिया के नाम से जाना जाता है, की अधिकांश आबादी रूस सर्मथक मानी जाती है। यूक्रेन आज आंतरिक संकट का सामना कर रहा है, परंतु इसका यह अर्थ नहीं कि कोई दूसरा देश उसके भौगोलिक सीमाओं में हस्तक्षेप करने लगे। मदद के नाम पर जिस तरह से रूस की सेना यूक्रेन में घुसी और उनकी देखरेख में जनमत संग्रह को अंजाम दिया गया वह भी सवालों के घेरे में है। पुतिन ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से ताजा घटनाक्रम पर बात की है। भारत और रूस पुराने मित्र हैं। भारत को चाहिए कि वह रूस के इस कदम के प्रति उसे आगाह करे और विश्व शांति के लिर खतरा बन रहे यूक्रेन के इस संकट को समय रहते सकारात्मक अंजाम तक पहुंचाने को आगे आए।
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