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विश्व चैंपियन का खिताब बचाने की चुनौती

खेल-प्रतिस्पर्धाएं कभी भी पहले से तय पटकथा के अनुसार आगे नहीं बढ़ती हैं।

विश्व चैंपियन का खिताब बचाने की चुनौती
एक दिवसीय क्रिकेट के ग्यारहवें विश्व कप का आगाज हो चुका है। इस बार आॅस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से इसकी मेजबानी कर रहे हैं। इसमें चौदह देशों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। इनके बीच 44 दिनों में 49 मैच खेले जाएंगे। अर्थात पहला मैच 14 फरवरी को खेला जाएगा और 29 मार्च को होने वाले फाइनल में इस बात का पता चल जाएगा कि क्रिकेट जगत का नया विश्व चैंपियन कौन है। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) हर चार साल के अंतराल पर विश्व कप का आयोजन करती है। इसकी शुरुआत 1975 में हुई थी।
पिछली बार 2011 में विश्व कप खेला गया था, जिसमें भारत विश्व चैंपियन बना था। निश्चित रूप से इस बार महेंद्र सिंह धोनी और उनकी टीम के कंधों पर विश्व चैंपियन का खिताब बचाने की चुनौती होगी। हालांकि वर्तमान प्रदर्शन को देखते हुए टीम इंडिया की क्षमताओं पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई पूर्व क्रिकेटर अभी से आशंका जताने लगे हैं। दरअसल, इस आशंका की मुख्य वजह गत दिनों संपन्न आॅस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के साथ त्रिकोणीय शृंखला में भारतीय क्रिकेट टीम का खराब प्रदर्शन है। आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में टीम इंडिया की क्या हालत हुई इससे क्रिकेटप्रेमी वाकिफ हैं। टीम के खराब प्रदर्शन ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के उत्साह पर कुछ हद तक पानी फेर दिया है। हमारी गेंदबाजी बेअसर साबित हो रही है जो कि चिंता की बात है। बल्लेबाजों का भी प्रदर्शन कुछ खास नहीं है। ऐसा तब है जब टीम लंबे समय से आॅस्ट्रेलिया में है।
हालांकि खिलाड़ियों को वहां के वातावरण में ढलने का मौका तो मिला, लेकिन उनका प्रदर्शन नहीं सुधरा। उनमें उत्साह नजर नहीं आ रहा है। आज टीम में सचिन, सहवाग, युवराज, जहीर, हरभजन आदि जैसे अनुभवी खिलाड़ी नहीं हैं। मौजूदा टीम में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और एक हद तक अजिंक्य रहाणे ही ऐसे खिलाड़ी हैं, जो तेज पिच वाले मैदानों पर खेलने का अनुभव रखते हैं। इस प्रकार मौजूदा टीम में गिने चुने खिलाड़ी ही हैं जिनसे हर परिस्थिति और वातावरण में समान प्रदर्शन की अपेक्षा की जा सकती है। इसके विपरीत आॅस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका की टीमें मजबूत नजर आ रही हैं। आॅस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को अपने घरेलू मैदान पर खेलने का लाभ भी मिलेगा।
बहरहाल, यह भी स्पष्ट है कि खेल-प्रतिस्पर्धाएं कभी भी पहले से तय पटकथा के अनुसार आगे नहीं बढ़ती हैं। 2003 के विश्व कप की तस्वीर सबके जेहन में होगी। विश्व कप से पहले भारतीय टीम को लेकर हर तरफ मायूसी थी, मगर दक्षिण अफ्रीका के मैदानों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए इसने फाइनल तक का सफर तय किया। वर्तमान टीम भी ऐसा प्रदर्शन करने की क्षमता और संभावनाओं से लैस है। कल भारत अपना पहला मैच एडिलेड में पाकिस्तान के विरुद्ध खेलेगा। यदि भारत को यहां जीत मिलती है तो टीम को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी। क्रिकेट को तो अनिश्चितताओं का खेल कहा गया है। कई बार मैदान पर यह साबित भी हो चुका है। दरअसल, यही इस खेल की खूबी है। उम्मीद है कि भारतीय टीम अपने ताज की रक्षा कर पाएगी।
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