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विवाद नहीं, व्यापार को तरजीह देने का फैसला

इन देशों के स्थापित होने जा रहे बैंक की शुरू के छह साल तक सरपरस्ती भारत के पास ही रहेगी।

विवाद नहीं, व्यापार को तरजीह देने का फैसला

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन दिन की भारत यात्रा पर पहुंच चुके हैं। अपनी इस महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद से करके जिनपिंग ने साफ संकेत दे दिए हैं कि उनका देश भारत में हाल ही में हुए बदलावों को मौके के तौर पर ले रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई को शपथ ग्रहण समारोह में ही पड़ोसी देशों को यह संकेत दे दिए थे कि वे उनके साथ भरोसे के रिश्ते कायम करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सार्क देशों के सभी राष्ट्र प्रमुखों के अलावा उनके शपथ ग्रहण समारोह में सुदूरवर्ती देश मॉरीशस के राष्ट्र प्रमुख ने भी हिस्सा लिया था। मोदी अब तक भूटान, नेपाल और जापान की यात्रा कर चुके हैं। वे ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्राजील की यात्रा भी कर चुके हैं, जहां उनकी पहले ही चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से औपचारिक मुलाकात हो चुकी है। ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में भारत की बड़ी उपलब्धि यह रही कि इन देशों के स्थापित होने जा रहे बैंक की शुरू के छह साल तक सरपरस्ती भारत के पास ही रहेगी। प्रधानमंत्री मोदी की हाल की जापान यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई थीं। खासकर चीन इस यात्रा को बड़ी उत्सुकता से देख रहा था। पूर्वी एशिया की कूटनीति की बात करें तो जापान और चीन के बीच काफी समय से तनाव चला आ रहा है। ऐसे में भारत और जापान के बीच बढ़ते सहयोग से चीन की चिंताएं स्वाभाविक तौर पर बढ़ती हैं। चीन के राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे मौके पर हो रही है, जब प्रधानमंत्री जापान की सफल यात्रा से लौटे हैं और अमेरिका की यात्रा पर प्रस्थान करने वाले हैं। जापान ने मोदी की यात्रा को खास महत्व देते हुए न केवल अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं बल्कि भारत में 35 अरब डॉलर के निवेश के प्रति प्रतिबद्धता भी जाहिर की है। इसके तुरंत बाद चीन की तरफ से यह संकेत दिए जाने लगे थे कि जिनपिंग भारत में 100 से 300 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर सकते हैं। शी की इस यात्रा और मोदी की जापान यात्रा में कुछ समानताएं भी नजर आ रही हैं। जैसे मोदी सीधे टोक्यो पहुंचने के बजाय क्योटो पहुंचे, जहां जापान के पीएम शिंजो एबे ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनकी अगवानी की। इसी तरह चीनी राष्ट्रपति भी नई दिल्ली पहुंचने के बजाय अहमदाबाद पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनकी अगवानी की। जिस तरह क्योटो की तर्ज पर बनारस का विकास करने का फैसला जापान ने लिया, उसी तरह ग्वांग्झो की तर्ज पर चीन ने अहमदाबाद को विकसित करने का निर्णय लिया है। 18 सितंबर को दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर दस्तख्त होने की संभावना है। मोदी बुनियादी ढांचे के विकास में विदेशी निवेश के जरिए अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाना चाहते हैं और इस कोशिश में वे सफल होते हुए दिखाई दे रहे हैं। चीन और भारत के बीच यह शिखर वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों की सरहद पर लगातार तनाव बना हुआ है। यह अच्छी बात है कि विवादों के बजाय दोनों देशों ने आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाने को तरजीह दी है परन्तु भारतीय नेतृत्व को अपने चीनी समकक्ष को देश की चिंताओं से अवगत कराते हुए सभी विवादित मसलों का हल करने को कहना ही होगा।

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