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भारत बन सकता है विश्व का ग्रोथ इंजन

हालात सुधारने के लिए वह अपनी मुद्रा युआन का अवमूल्यन कर चुका है, लेकिन निर्यात में वृद्धि नहीं हो पा रही है।

भारत बन सकता है विश्व का ग्रोथ इंजन
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अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती और मंदी की गिरफ्त में आए चीन ने भारत को भी कुछ हद तक प्रभावित किया है। हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो वैश्विक आर्थिक घटनाओं का भारत पर सीमित समय के लिए असर होगा, बल्कि यह हलचल हमारे लिए कई क्षेत्रों में संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों व अर्थविदों के बीच हुई बैठक बताती है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही अनिश्चितताओं को लेकर चिंतित है और इसका लाभ लेने को भी उत्सुक है। अभी विश्व जगत मंदी की चपेट में है। अमेरिका में कुछ हद तक सुधार देखने को मिल रहे हैं, लेकिन यूरोप के अधिकांश देश कर्ज संकट में डूबे हैं। जापान, ब्राजील और रूस में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। चीन जो विश्व अर्थव्यवस्था का अगुआ बना हुआ था, अब उसका भी बुलबुला फूट गया है। उसकी न सिर्फ विकास की रफ्तार धीमी हो गई है, बल्कि निवेशकों का भी उससे भरोसा उठने लगा है। हालात सुधारने के लिए वह अपनी मुद्रा युआन का अवमूल्यन कर चुका है, लेकिन निर्यात में वृद्धि नहीं हो पा रही है।

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चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है, लेकिन मंदी के चलते मांग कम होने से उसके उत्पाद खप नहीं पा रहे हैं। चीन की सोच थी कि मुद्रा कमजोर करने से वस्तुओं के दाम कम हो जाएंगे तो निर्यात बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका भारत और एशिया के दूसरे बाजारों के अलावा दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। भारतीय शेयर बाजार सोमवार को 15 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा गया। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले दो साल पुराने निचले स्तर (66.82) पर पहुंच गया। हालांकि ये गिरावट स्थाई नहीं हैं। किसी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए जो कारक उत्तरदायी होते हैं, वे सभी आज भारत के अनुकूल हैं। राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा दोनों नियंत्रण में हैं। महंगाई कई महीने से शून्य से भी नीचे बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमत ऐतिहासिक गिरावट पर है। ऐसे में चीन के धाराशाई होने के बाद सबकी नजरें भारत पर टिकी हैं। ऐसा कहा जाने लगा है कि भारत में क्षमता है जिससे कि वह विश्व का ग्रोथ इंजन बन सकता है और दुनिया को मंदी से बाहर निकाल सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी कहा है कि उभरते बाजारों में भारत चमकता हुआ सितारा है। यहां बड़ा बाजार होने के साथ-साथ मांग मौजूद है। र्शम की प्रचुरता है। केंद्र सरकार देश में ढांचागत विकास के लिए भारी निवेश करने की योजना बना रही है। जरूरत है, निवेशक जोखिम उठाते हुए भारी निवेश करें, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जोर दिया है।

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हालांकि इसके लिए अभी कई तरह के आर्थिक सुधार करने की जरूरत है। मसलन राज्यों को अधिकार दिया जाना चाहिए कि वे अपने अनुसार भूमि अधिग्रहण कानून बना सकें। वस्तु एवं सेवा कर बिल को जल्द से जल्द कानून का रूप दिया जाना चाहिए जिससे अगले साल से पूरा देश एक बाजार का रूप ले सके और करों में विसंगतियां दूर हो सकें। रिर्जव बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की जानी चाहिए। साथ ही र्शम कानूनों में सुधार को अमलीजामा पहनाने की जरूरत है। और सबसे महत्वपूर्ण देश में कौशल विकास कार्यक्रम में तेजी लाते हुए कारोबार के नियमों को आसान बनाया जाना चाहिए, जिससे मेक इन इंडिया योजना साकार हो सके।

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