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भुजबल की गिरफ्तारी से खुली भ्रष्टाचार की पोल

पिछले साल भुजबल और उनके करीबी रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। तब तय हो गया था कि देर-सवेर भुजबल की गिरफ्तारी होनी है।

भुजबल की गिरफ्तारी से खुली भ्रष्टाचार की पोल
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नासिक में एक पिछड़े वर्ग के परिवार में जन्मे 68 वर्षीय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता छगन भुजबल की भ्रष्टाचार के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई गिरफ्तारी पर मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा में विरोधी दलों के विधायकों ने भले ही हंगामा किया हो, एनसीपी की जो फजीहत होनी थी, वह तो हो चुकी। दो बार राज्य के उप मुख्यमंत्री, मंत्री और दो बार मुंबई के मेयर रह चुके भुजबल पर पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते हुए राज्य के खजाने को नौ सौ करोड़ रुपये का चूना लगाने और धन शोधन के गंभीर आरोप हैं। कांग्रेस-एनसीपी अपना चेहरा बचाने के लिए भले ही भाजपा-शिवसेना सरकार पर राजनीतिक बदले से की गई कार्रवाई बता रहे हों, वस्तुस्थिति यही है कि प्रवर्तन निदेशालय 2014 से अदालती देख-रेख में उनके भ्रष्टाचार की जांच कर रहा है। जून 2015 में मुंबई, पुणे सहित उनके और करीबी रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। तब तय हो गया था कि देर-सवेर भुजबल की गिरफ्तारी होनी है। उनका भतीजा पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। बेटे से घंटों पूछताछ हो चुकी है। गिरफ्तारी से पहले भुजबल से करीब दस घंटे पूछताछ हुई है। भुजबल शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के अकेले नेता नहीं हैं, जिन पर मंत्री रहते हुए मोटा माल बनाने और सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाने के संगीन आरोप लगे हैं। शरद पवार के भतीजे अजीत पवार पर भी सिंचाई घोटाले के गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच अंतिम चरण में बताई जा रही है। भुजबल ऐसे अकेले नेता भी नहीं हैं, जिनका रिश्ते एनसीपी और कांग्रेस से हों और जिन्हें जेल जाना पड़ा हो। ऐसे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने पद पर रहते हुए करोड़ों के गोलमाल किए। डा. मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन दिल्ली में हुआ। पुणे से सांसद सुरेश कलमाड़ी पर सैकड़ों करोड़ के घोटाले के आरोप लगे। वे अपने कुछ सहयोगियों के साथ गिरफ्तार भी किए गए। इसी तरह तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा (डीएमके) सहित कई कारपोरेट घरानों से जुड़े अधिकारियों की 2-जी घोटाले में गिरफ्तारी हुई। उस दौरान टू-जी ही नहीं, कोयला घोटाले में भी पौने दो लाख करोड़ से अधिक की हेराफेरी के आरोप सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में लगाए। महाराष्ट्र के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर भी गंभीर आरोप लगे। उसकी जांच अभी जारी है। कांग्रेस और यूपीए सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के मामलों का एक लंबा सिलसिला है। छगन भुजबल तो उसकी एक बानगी मात्र है। सबसे आश्चर्यजनक और शर्मनाक बात यह है कि जब भी इस तरह के भ्रष्टाचारी जांच एजेंसियों की लंबी कवायद के बाद कानून के शिकंजे में फंसते हैं, तब बड़ी आसानी से राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही कार्रवाई बताकर लोगों की आंखों में धूल झोंकने के प्रयास किए जाते हैं। छगन भुजबल की राजनीतिक यात्रा पर नजर दौड़ाने से पता चलता है कि उन्होंने पद हासिल करने के लिए किस तरह राजनीतिक निष्ठाएं बदली हैं। पच्चीस साल तक वे बाला साहेब ठाकरे के विश्वासपात्र रहे। उनकी बदौलत मेयर बने। जब लगा कि भाजपा-शिवसेना सत्ता में नहीं आ रही, तब शरद पवार के कहने पर कांग्रेस में शामिल होकर मंत्री बन गए। पवार ने कांग्रेस छोड़कर एनसीपी बनाई तब ये भी उनकी नई पार्टी में चले गए। वहां दो बार उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन उनका मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं हो सका। एक साधारण परिवार में जन्म लेने वाले भुजबल ने हजारों करोड़ की संपत्ति बनाई, यह अपने आप में भ्रष्ट राजनीति की एक विद्रुप मिसाल है। महाराष्ट्र की भ्रष्ट राजनीति की कुछ और परतें निकट भविष्य में खुलने की उम्मीद है।

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