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चिंतनः तमिलनाडु के साथ खड़े होने का समय

चिंता की बात यह है कि तमिलनाडु का यह संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है।

चिंतनः तमिलनाडु के साथ खड़े होने का समय
भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में भारी बारिश के कारण आई तबाही कितनी भयावह है, इसका अंदाजा वहां से आ रही तस्वीरों से लगाया जा सकता है। राजधानी चेन्नई सहित राज्य के कई हिस्सों का बाकी देश से एक तरह से संपर्क टूटा हुआ है। कई स्थानों पर जमीन से पांच फीट ऊपर तक पानी भरा हुआ है जिससे लोग घरों की छतों व दूसरे ऊंचाई वाले स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।
बिजली की आपूर्ति पूरी तरह बंद है ही, संचार सेवा के प्रभावित होने से करीब चालीस फीसदी फोन कनेक्शन काम नहीं कर रहे हैं। सड़क, ट्रेन और हवाई यातायात पूरी तरह से ठप हो गए हैं। जन-धन की क्षति का आंकड़ा भी हर पल बढ़ता जा रहा है।
चिंता की बात यह है कि तमिलनाडु का यह संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। मौसम विभाग ने कहा है कि अल नीनो के कारण बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव वाला क्षेत्र अगले दो दिनों तक प्रदेश में भारी बारिश ला सकता है। इस आपदा ने फिर साबित किया है कि प्रकृति के सामने मनुष्य कितना बेबस व लाचार है। वह अपनी विकरालता से हमारी सभी व्यवस्थाओं व इंतजामों को बौना साबित कर सकती है।
हालांकि अच्छी बात यह है कि तमाम प्रतिकूलताओं के बाद भी देश मानवता की रक्षा के लिए उठ खड़ा हुआ है। जिसके पास जितनी क्षमता व संसाधन हैं उसी से पीड़ितों की मदद में जुट गया है। किसी आपदा या दूसरे संकटों से घिरे लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाने की यही भावना होनी चाहिए।
केंद्र सरकार इस संबंध में अति सक्रियता दिखा रही है। वह राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पीड़ितों को संकट से उबारने में पहले दिन से ही जुटी है। तमिलनाडु सरकार ने एक तरफ जहां अपनी मशीनरियों को राहत व बचाव कार्य में लगाया है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने भी अपनी ताकत झोंक दी है। एनडीआरएफ और सेना के जवान हर जरूरतमंद तक मदद पहुंचाने में जी जान से जुटे हुए हैं। नौसेना ने भी बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के विशेष इंतजाम किए हैं।
यह केंद्र-राज्य में सहयोग की एक मिसाल है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्परता दिखाते हुए किसी बुलावे का इंतजार किए बगैर हवाई सर्वे कर पीड़ितों की स्थिति का जायजा लिया है। साथ ही तुरंत राहत के लिए एक हजार करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की है।
केंद्र सरकार राज्य को बाढ़ से निपटने के लिए 940 करोड़ रुपये की मदद पहले ही कर चुकी है। ऐसा देखा गया है कि सत्ता में आने के बाद से देश में जब-जब ऐसी आपदा आई है तब-तब उन्होंने इससे निपटने के लिए ऐसी ही तीव्रता दिखाई है। पड़ोसी देश नेपाल और बिहार में जब भूकंप ने कहर बरपाया था तब सबसे पहले रिस्पॉन्स इन्होंने ही किया था।
उनकी इस सक्रियता की तारीफ विरोधी भी करते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा है कि मोदी एक ईमानदार नेता हैं और भारत के भविष्य को लेकर उनकी स्पष्ट नीति है।
जाहिर है, हम आपदाओं को रोक नहीं सकते, लेकिन यदि पीड़ितों तक समय से मदद पहुंचा दें तो उससे बड़ी सेवा और कुछ नहीं हो सकती। इसके लिए सत्ता में बैठे लोगों को इसी तरह की सक्रियता दिखाने की जरूरत है।
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