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चिंतन: पाकिस्तान के बदलते रुख से सतर्क रहने की जरूरत

भारत की एनआईए को पाकिस्तान का दौरा करने की इजाजत देने पर कोई सहमति नहीं हुई है।

चिंतन: पाकिस्तान के बदलते रुख से सतर्क रहने की जरूरत

पाकिस्तान उच्चायुक्त अब्दुल बासित के उस बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत है कि दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया निलंबित हो चुकी है और भले ही पाकिस्तानी संयुक्त जांच दल (जेआईटी) ने पठानकोट का दौरा कर लिया है, भारत की एनआईए को पाकिस्तान का दौरा करने की इजाजत देने पर कोई सहमति नहीं हुई है। हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि जेआईटी के दौरे से पहले ही इस पर सहमति बन गई थी कि एनआईए की टीम भी पाकिस्तान का दौरा करेगी।

अब्दुल बासित ने बलूचिस्तान में भारत की कथित दखलांदाजी का आरोप लगाते हुए वहां पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण यादव की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास इस तरह के और भी सबूत हैं। अब्दुल बासित ने यह बयानबाजी ऐसे समय की है जब पाक मीडिया के एक हिस्से में पठानकोट का दौरा करने वाली जेआईटी के हवाले से ऐसी खबरें प्रकाशित कराई गई हैं कि पठानकोट एयरबेस पर हमले का नाटक खुद भारत ने ही पाक को बदनाम करने के लिए रचा था। ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लाहौर यात्रा से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच बढ़ती समझबूझ को वहां की सेना और आईएसआई पचा नहीं पा रही हैं।

ऐसा पहली बार हुआ है कि भारत ने किसी पाक जांच टीम को यहां आने की इजाजत दी। इसे लेकर नुक्ताचीनी भी हुई कि पाक टीम में आईएसआई के अधिकारी को अनुमति क्यों दी गई है जबकि यह एजेंसी भारत के खिलाफ साजिशें रचती रही है। बहरहाल, जेआईटी का दौरा हो चुका है। उसे अपनी रिपोर्ट नवाज शरीफ को सौंपनी है। उससे क्या निकलता है, यह तो बाद की बात है परन्तु जिस तरह टीम की कथित रिपोर्ट को लीक कराकर माहौल बिगाड़ने की कोशिशें की गईं और अब पाक उच्चायुक्त ने बयानबाजी कर भारत पर आरोप लगाए हैं, इससे साफ है कि नवाज शरीफ भले ही दोनों देशों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने और आतंकवाद को जड ़से उखाड़ फेंकने की बात कर रहे हैं परन्तु पाक सेना और कुछ भारत विरोधी तत्व इस पूरी कवायद को पलीता लगाने की मुहिम में जुट गए हैं।

भारत में भी पाक के साथ पीएम नरेंद्र मोदी की विश्वास बहाली की ताजा कोशिशों को शक की दृष्टि से देखने वालों की कमी नहीं है। उनके तर्क और शक बेवजह भी नहीं हैं। वे जानना चाहते हैं कि पाक ने 2008 में मुंबई पर हुए हमले के दोषियों को अब तक सजा क्यों नहीं दी? जो देश पूरी दुनिया की आंखों में धूल झोंक रहा है, वह भारत में होने वाले हमलों पर गंभीरता दिखाते हुए उसके जिम्मेदार आतंकवादियों और स्टेट एक्टर्स को उनके अंजाम तक पहुंचाएगा, इसकी उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। पाक का इतिहास बताता है कि उस पर भरोसा करना खतरे से खाली नहीं है परन्तु भारत ने शांति की पहल करते हुए दोस्ती का जो हाथ बार-बार बढ़ाया है, वह पूरी दुनिया देख रही है। ऐसा नहीं है कि भारत के पास विकल्पों की कमी है।

उसके सामने वैसा ही विकल्प मौजूद है, जैसा ओसामा बिन लादेन को ठिकाने लगाने के लिए अमेरिका ने अपनाया था। उसने पाक सीमा में घुसकर ओसामा को मारा था। बासित की बयानबाजी के बाद निश्चित रूप से हालात बदले हैं। इससे वे तत्व फिर से आतंकी हमले की तैयारी कर सकते हैं, जो बातचीत टूटने का इंतजार करते रहते हैं। यही वजह है कि नई दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हाईलेवल बैठक में ताजा हालात का जायजा लिया गया और हर स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा भी की गई है। भारत को पाकिस्तान की धरती से रची जाने वाली हर साजिश को विफल करने के लिए अपने स्तर पर कमर कसकर तैयार रहना ही होगा।

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