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हुदहुद की चुनौतियां और सरकारी तैयारी

हुदहुद बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान का नाम है।

हुदहुद की चुनौतियां और सरकारी तैयारी

प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, परंतु उनका पूर्वानुमान लगा लिया जाए तो उनसे होने वाली जानमाल की क्षति को कम किया जा सकता है। एक तस्वीर पिछले वर्ष जून में उत्तराखंड और इस वर्ष जम्मू-कश्मीर में आई आपदा की है, वैज्ञानिक दोनों का पूर्वानुमान लगाने में असफल रहे। और फिर प्रकृति की विनाशलीला सभी ने देखी। वहीं दूसरी तस्वीर बीते वर्ष ओडिशा और आंध्र प्रदेश में आए फैलिन तूफान और इस रविवार को आए हुदहुद तूफान की है। दोनों चक्रवाती तूफान का मौसम वैज्ञानिकों द्वारा करीब हफ्ते भर पहले ही अनुमान लगा लेने से जन हानि की तीव्रता को कम किया जा सका है।

हुदहुद बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान का नाम है। यह आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय जिलों से टकराता उससे पहले ही केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर तमाम एहतियाती कदम उठा लिए थे। लोगों तक चक्रवात की भयावहता और आने के समय से जुड़ी सारी जरूरी सूचनाएं पहुंचा दी गई थी। चक्रवात के दौरान उन्हें किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए इसकी जानकारी भी सभी माध्यमों से उन तक पहुंचा दी गई थी। यही वजह हैकि हुदहुद चक्रवात के दौरान 170 से 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश आने से जगह-जगह पेड़ उखड़ गए, घरें गिर गर्इं, बिजली के खंभे और होर्डिंग्स उखड़ गए, परंतु बहुत लोग हताहत नहीं हुए।

सरकार अपनी तैयारियों से बहुत हद तक लोगों को सुरक्षा देने में सफल रही है। हालांकि ऐसी आपदाओं में संपत्ति की हानि को रोकना कठिन है। अब जब तूफान और बारिश रुकेगी तब ही नुकसान की तस्वीर स्पष्टहो पाएगी, परंतु ऐसे समय में जब फसलें पक कर कटने को तैयार हैं तब यह तूफान और बारिश अतिरिक्त कष्टदायक साबित होगी। सरकार द्वारा खतरे वाली जगहों से पहले ही करीब 1.5 लाख लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुचा दिया गया था। इनके लिए करीब 370 राहत कैंप लगाए गए हैं।

हुदहुद की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की 44 टीमों को जगह-जगह तैनात किया है। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में सैन्यकर्मियों को तैनात किया गया है। भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान ने मदद के लिए चार जहाजों को उतारा है। इन जहाजों पर अतिरिक्त गोताखोर, डॉक्टर, रबड़ की नौकाएं, हेलीकॉप्टर, भोजन, तंबू, कपड़ों और दवाओं सहित राहत सामग्री तैयार रखी गई है। वहीं तत्काल नोटिस पर काम करने के लिए अतिरिक्त राहत सामग्री के साथ गोताखोरों की 30 टीमें और चार प्लाटून तैयार रखी गयी हैं। अभी तूफान के चलते दोनों राज्यों के तटीय इलाकों में हवाएं चल रही हैं और साथ ही भारी बारिश भी हो रही है।

मौसम विभाग के अनुसार धीरे-धीरे हवा की रफ्तार कम होगी, लेकिन साथ ही अगले तीन दिनों तक बारिश जारी रह सकती है। चक्रवात के प्रभाव से बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर भी बारिश होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों के सटीक पूर्वानुमान और सरकारी स्तर पर उठाए गए एहतियाती कदम से ही एक बड़ी आपदा से बचाव संभव हो पाया है।

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