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लगातार दूसरा विश्व कप जीतने की होगी चुनौती

जड़ेजा बेहतरीन आॅल राउंडर हैं और चयनकर्ताओं को भरोसा है कि अगले दस-पंद्रह दिनों में वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।

लगातार दूसरा विश्व कप जीतने की होगी चुनौती
अगले महीने आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले विश्वकप के लिए टीम इंडिया के पंद्रह खिलाड़ियों के नामों का आखिरकार मंगलवार को ऐलान कर दिया गया। इनमें ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं है, जिस पर चौंका जाए। रवीन्द्र जडेजा की फिटनेस को मुद्दा बनाकर पहले दिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में युवराज सिंह के नाम को जरूर उछाला गया, परन्तु सब अवगत थे कि चयनकर्ताओं ने उन्हें उन तीस खिलाड़ियों में भी शामिल करना मुनासिब नहीं समझा था, जिनमें से अंतत: पंद्रह खिलाड़ी चुने जाने थे। जड़ेजा बेहतरीन आॅल राउंडर हैं और चयनकर्ताओं को भरोसा है कि अगले दस-पंद्रह दिनों में वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।
पिछले विश्वकप के हीरो रहे युवराज सिंह का नाम केवल इस कारण मीडिया में उछाला गया, क्योंकि अस्वस्थता के चलते जडेजा के चयन पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। कुछ लोगों ने स्टुअर्ट बिन्नी को आॅल राउंडर के तौर पर टीम में स्थान दिए जाने पर सवाल उठाए हैं परन्तु चाहे सौरव गांगुली हों या अजहरूद्दीन, सबने उनके चयन को सही कारर देते हुए चयनकर्ताओं के फैसले का बचाव किया है। दरअसल, उनके चयन को संदेह की दृष्टि से देखने के पीछे कहीं न कहीं चयनकर्ता के रूप में उनके पिता रोजर बिन्नी का होना भी माना जा रहा है।
हालांकि रोजर बिन्नी बैठक में जानबूझकर एक घंटा देरी से पहुंचे ताकि बाकी चयनकर्ता उनकी अनुपस्थिति में स्वतंत्र रूप से टीम और नामों पर चर्चा कर लें। चुनी गई टीम में 2011 की विश्व कप विजेता टीम में से अधिकांश खिलाड़ी गायब हैं। उनमें से कई संन्यास ले चुके हैं और कुछ को 2015 के विश्व कप की टीम के लायक नहीं माना गया क्योंकि वे रौ में नहीं हैं। कुछ की बैटिंग लय में नहीं हैं और कुछ की फील्डिंग को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सौरव की मानें तो ये नई टीम इतनी भी नई हैं। इसमें धोनी, विराट कोहली, सुरेश रैना, रोहित शर्मा, शिखर धवन और अजिंक्य रहाणे जैसे अनुभवी बल्लेबाज हैं तो ईशांत शर्मा, भुवनेश्वर कुमार, उमेश यादव और आर अश्विन जैसे गेंदबाज हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में अपनी पहचान कायम कर चुके हैं। सौरव का आकलन बहुत हद तक सही है।
सचिन तेंदुलकर, वीरेन्द्र सहवाग और युवराज सिंह जैसे चेहरे अब टीम का हिस्सा नहीं हैं। यह सही है कि युवराज सिंह ने हाल ही में रणजी में तीन शतक लगाकर फार्म में लौटने के संकेत दिए हैं परन्तु फिटनेस और निरंतरता के मोर्चे पर वह विफल होते रहे हैं। सचिन संन्यास ले चुके हैं और सहवाग लय में नहीं हैं। क्षेत्ररक्षण के मोर्चे पर भी वह फिसड्डी साबित होते रहे हैं। इस लिहाज से विश्व कप के लिए चुनी गई इस यूथ ब्रिगेड को सर्वश्रेष्ठ माना जा रहा है। भारतीय टीम 2011 की विश्व चैंपियन रही है। इस दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ टीम को आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेजना जरूरी था। भारत कपिल देव के नेतृत्व में 1983 में पहली बार विश्व कप जीता था। उसके बाद धोनी के नेतृत्व में पिछला विश्व कप उसने जीता। यदि 2015 में भी वह जीतने का करिश्मा दोहराता है तो यह उसकी शानदार कामयाबी होगी।
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