Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

चिंतन: भ्रष्टाचार पर आप का दोहरा मानदंड

सीबीआई ने भी स्पष्ट कहा है कि उसने मुख्यमंत्री के दफ्तर पर कोई छापा नहीं मारा है।

चिंतन: भ्रष्टाचार पर आप का दोहरा मानदंड
X
भ्रष्टाचार विरोधी नारे के साथ राजनीति में आईआम आदमी पार्टी अब इस पर दोहरे मानदंड अपनाती दिख रही है। पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई के छापे को ना सिर्फ गलत और साजिश बता रहे हैं बल्कि उनके बचाव में सारी हदें पार कर चुके हैं।
राजनीतिक दांव पेंच में उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ भाषा का जो स्तर गिराया, उसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम है। आज राजनीति में टिका टिप्पणी के दौरान जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है उस पर सोचने की जरूरत है। यह पूरा प्रकरण बिना सोचे समझे या सच्चाई जाने बिना राजनीतिक दलों द्वारा प्रतिक्रिया देने का जो एक सिलसिला चल निकला है उससे कितने गंभीर संकट खड़े हो सकते हैं इसका भी प्रमाण है।
राजेंद्र कुमार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के सिलसिले में सीबीआई ने उनके दफ्तर और घर पर छापा क्या मारा अरविंद केजरीवाल और पार्टी के दूसरे नेताओं की बौखलाहट देख देश हैरान हो गया। वे यहां तक कहने से नहीं चूके कि केंद्र सरकार उन्हें सीबीआई के जरिए परेशान कर रही है, लेकिन जब सच्चाई सामने आई कि सीबीआई ने बकायदा कोर्ट से सर्च वारंट ले कर यह कार्रकाई की है, तो उनके नेताओं के पास कोई जवाब नहीं था। उसके बाद से ही वे अपनी गैर जिम्मेदार टिप्पणियों को सही साबित करने के लिए झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं।
आम आदमी पार्टी की ओर से पहले कहा गया कि सीबीआई डीडीसीए की फाइल लेकर गई है, बाद में कहा कि ले नहीं गई बल्कि उसके अधिकारियों ने पढ़ी हैं, हो सकता है फोटोकॉपी कराकर ले गए हों। इससे यही जाहिर होता है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली को बदनाम करने के लिए पूरी आम आदमी पार्टी मनगढ़ंत बातें कर रही है। अपनी गलतियों को ढंकने के लिए मामले को अलग रंग देने की कोशिश कर रही है।
वहीं सीबीआई ने भी स्पष्ट कहा है कि उसने मुख्यमंत्री के दफ्तर पर कोई छापा नहीं मारा है। उनकी जांच सिर्फ राजेंद्र कुमार तक सीमित है, जिन पर कई मामलों में भ्रष्टाचार का आरोप है जिसकी शिकायत एक सरकारी अधिकारी ने की है। सच यह है कि आरोपों की छानबीन के दौरान सीबीआई ने चौदह अन्य जगहों पर छापा मारा जिसमें से दिल्ली सचिवालय स्थित उनका दफ्तर भी शामिल था। अरविंद केजरीवाल एक और बात कह रहे हैं कि छापे से पहले उन्हें नहीं बताया गया, लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यवस्था को कुछ माह पहले ही खत्म कर दिया है, जिसमें सचिव या संयुक्त सचिव स्तर या इससे ऊपर के अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले अनुमति लेने का प्रावधान था।
इस फैसले को उन्होंने भी स्वीकारा था। वहीं राजेंद्र कुमार पर बहुत पहले से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि सब कुछ जानते हुए भी केजरीवाल ने इन्हें प्रधान सचिव क्यों बनाया। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की ओर से कहा गया है कि उसने इसी साल मई में राजेंद्र कुमार के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की जानकारी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व दिल्ली के मुख्यमंत्री को भेजी थी। सवाल उठता है कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की बातें करने वाले अरविंद केजरीवाल ने इसकी जांच क्यों नहीं कराई? अब जब सीबीआई ने कार्रवाई आरंभ की है तो उसकी जांच पर सवाल उठा कर आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल कहीं न कहीं अपने को भ्रष्टाचार के आरोपी के साथ खड़ा कर रहे हैं।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top