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फिर सामने आया पाक का आतंकी चेहरा

आखिर कब तक भारत पाकिस्तानी आतंक का आसान निशाना बनता रहेगा?

फिर सामने आया पाक का आतंकी चेहरा

पाकिस्तान के नापाक चेहरे पर से एक बार फिर नकाब उतर गया है। मुंबई हमले में शामिल रहे अजमल कसाब के बाद जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में मोहम्मद नावेद नाम का आतंकी भारतीय सुरक्षा बलों के हाथ लगा है। पकड़े गए आतंकी ने स्वयं बताया है कि वह पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला है। उसका संबंध आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से है और दस दिन पहले वह आतंक मचाने के इरादे से भारत में घुसा था।

उससे पूछताछ का सिलसिला जैसे जैसे आगे बढ़ेगा और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी। मसलन आतंकियां की आगे की रणनीति क्या है? भारत में उनकी घुसपैठ कैसे होती है तथा यहां उनकी कौन मदद करता है? साथ ही पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के बारे में भी पता चलेगा। वहां चलाई जा रही आतंकी कैंपों की कार्यप्रणाली से भी परदा उठाने में मदद मिलेगी।

यह स्थापित तथ्य है कि भारत में होने वाले आतंकी हमलों के तार कहीं न कहीं पाकिस्तान से जुड़े होते हैं। बीते दिनों पंजाब के गुरदासपुर में हमला करने वाले आतंकवादियों के पास से मिले जीपीएस से लैस नेविगेशन डिवाइस से प्राप्त तथ्यों से यह बात साबित हुई थी कि वे पाकिस्तान से आए थे। वहीं पाकिस्तानी संघीय जांच एजेंसी के पूर्व प्रमुख तारिक खोसा ने वहां के एक अखबार में लिखे लेख में कहा है कि जांच में इस बात के पर्याप्त सबूत मिले हैं कि 2008 के मुंबई हमलों की पूरी साजिश पाकिस्तान में ही रची गई थी।

यही नहीं कईखुफिया रिपोटरें में भी यह बात सामने आई है कि पाक सेना और आईएसआई भारत के खिलाफ छद्म युद्ध कर रहे हैं। इसके लिए वे आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अकसर देखा जाता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच जब-जब बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जाती है तब-तब कुछ ऐसा होता है जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी आ जाती है। गत दिनों रूस के उफा में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच हुई वार्ता में संबंध सुधारने की प्रक्रिया फिर से आरंभ करने पर जोर दिया गया था।

उसके बाद से पाकिस्तान की ओर से कटुता बढ़ाने वाली गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। दरअसल, पाकिस्तान की सेना और कट्टरपंथी नहीं चाहते कि भारत से रिश्ता सुधरे, लिहाजा वे कभी संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहे हैं, तो कभी आतंकी हमलों को अजाम दे रहे हैं। उनके दबाव में पाक सरकार भी आ गई है। हालांकि भारत ने उफा में बनी सहमतियों के बिंदुओं से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन साथ ही सख्ती दिखाने की भी जरूरत है।

आखिर कब तक भारत पाकिस्तानी आतंक का आसान निशाना बनता रहेगा? अब समय आ गया है कि उसे कड़ा सबक सिखाया जाए ताकि वह आतंकवाद को अच्छे व बुरे की नजर से देखना बंद करे। अतंरराष्ट्रीय शक्तियों को चाहिए कि वे पाकिस्तान से कहें कि वह आतंक रोके या फिर अंजाम भुगतने को तैयार रहे। बहरहाल, अब सरकार को फैसला करना है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में इन सबूतों के आधार पर पाकिस्तान को घेरेगी, बेनकाब करेगी या इससे भी बढ़कर पाक को पहले आतंकवाद रोकने के लिए दो टूक कहेगी।

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