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बजट सत्र के शांतिपूर्ण रहने की उम्मीद

संसद के सत्र को सुचारू रूप से चलाना सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष की भी जिम्मेदारी होती है।

बजट सत्र के शांतिपूर्ण रहने की उम्मीद
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संसद का बजट सत्र कई मायने में महत्वपूर्ण रहने वाला है। इसमें आम बजट, रेल बजट और आर्थिक सर्वेक्षण के साथ-साथ 44 विधेयक पेश किए जाएंगे। आम बजट किसी भी सरकार का सबसे बड़ा नीतिगत दस्तावेज होता है। बजट से सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों और आर्थिक चिंतन की झलक मिलेगी। इससे पता चलेगा कि देश की अर्थव्यवस्था की दिशा किधर रहने वाली है।

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वहीं रेलवे बजट से रेलवे की दशा और दिशा के बारे में पता चलेगा। इसकी जानकारी मिलेगी कि सरकार रेलवे को उबारने के लिए कौन-कौन से उपाय करने वाली है। वहीं मोदी सरकार इस सत्र में छह अध्यादेशों को विधेयक के रूप में पारित कराने का प्रयास करेगी। इन अध्यादेशों में कोयला, खान और खनिज, भूमि अधिग्रहण और बीमा क्षेत्र में एफडीआई से जुड़े अध्यादेश शामिल हैं। खासकर बीमा क्षेत्र और कोयला क्षेत्र से जुड़े अध्यादेशों को विधेयक का रूप देने के संबंध में सरकार पर खासा दबाव है, क्योंकि इससे बीमा क्षेत्र में एफडीआई आकर्षित करने के लिए नई व्यवस्था बनाई जा सकेगी और कोयला ब्लाकों की नीलामी बाधित नहीं होगी।

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हालांकि सत्र की शुरुआत से पहले ही विरोधी दल जिस तरह के टकराव के रास्ते पर चलते दिख रहे हैं, वह शुभ संकेत नहीं है। विपक्षी दल सिर्फ भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव के लिए लाए गए अध्यादेश के खिलाफ ही लामबंद नहीं हैं, बल्कि वे दूसरे कुछ विधेयकों के विरोध में भी आवाज बुलंद किए हैं।

लिहाजा पिछला सत्र जिस तरह हंगामे का शिकार हो गया था, उसे देखते हुए यह आशंका आधारहीन नहीं है कि इस बार भी संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने में मुश्किल आ सकती है। पिछले सत्र में विपक्षी दलों के अवरोध का ही नतीजा था कि मोदी सरकार को अध्यादेश लाना पड़ा था। इसलिए इस संसदीय सत्र की चुनौती केवल यह नहीं है कि सरकार को बजट पास कराना है, बल्कि यह भी है कि पिछले दिनों जिन अध्यादेशों का सहारा लिया गया उन्हें कानून का रूप कैसे दिया जाए।

सरकार के सामने यह बड़ा सवाल इसलिए भी है,क्योंकि संसद के उच्च सदन राज्यसभा में उसके पास बहुमत नहीं है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अहम आर्थिक सुधारों पर कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल बेजा टकराव की बजाय सरकार का साथ देंगे। और यदि किसी मुद्दे पर मतभेद है तो आम सहमति से बीच का कोई रास्ता निकालेंगे, लेकिन किन्हीं कारणों से जरूरी विधेयक कानून का रूप नहीं ले पाते तो देश का ही नुकसान होगा।

संसद के सत्र को सुचारू रूप से चलाना सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष की भी जिम्मेदारी होती है। वहीं सत्ता पक्ष को भी चाहिए कि वह विपक्ष की बातों को धैर्यपूर्वक सुनकर उनकी शंका का समाधान करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा हैकि संसद में विपक्ष जिस भी मुद्दे पर मांग करेगा उन पर बहस कराई जाएगी। विपक्षी दलों को सोचना चाहिए कि अगर वे गड़े मुर्दे उखाड़कर संसद का समय बर्बाद करेंगे तो न उनके हित में होगा न देश के हित में। जिस राजनीतिक और आर्थिक माहौल में सत्र की शुरुआत हो रही है उसमें इस बजट सत्र से लोगों को ढेरों उम्मीदें हैं। ऐसे में ये सबकी जिम्मेदारी बनती है कि बजट सत्र को सुचारू रूप से चलाएं। प्रधानमंत्री ने भी कहा हैकि देशवासी बजट सत्र की ओर आशाओं और आकांक्षाओं के साथ देख रहे हैं।

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