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चीन की चिंता में डूबे दुनिया के बाजार

चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है। वैश्विक मंदी के कारण दुनिया में मांग कम होने के चलते उसके उत्पादन में गिरावट आई है।

चीन की चिंता में डूबे दुनिया के बाजार
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बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में सोमवार को 1625 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी निवेशकों की भारी बिकवाली के दबाव में 531 अंक टूट गया। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर हो कर करीब 66 के स्तर पर गिर गया, जो कि दो साल का सबसे निचला स्तर है। भारतीय शेयर बाजार में इससे पहले 2008 में ऐसी गिरावट देखी गई थी। तब अमेरिकी बाजार धाराशायी हुए थे इस बार चीनी बाजार में आए तूफान से भारत सहित सभी प्रमुख बाजार प्रभावित हुए हैं। भारतीय शेयर बाजार में करीब छह फीसदी की गिरावट दर्जकी गई, वहीं शंघाई कंपोजिट साढ़े सात फीसदी, जापान का निक्केई तीन फीसदी, हैंगसेंग 4.25 फीसदी, कोरियाई कोस्पी 2.2 फीसदी और ताइवान का सूचकांक सात फीसदी गिर गया। इस एक दिनी गिरावट से सिर्फ भारत में ही निवेशकों को करीब सात लाख करोड़ रुपये की चपत लग गई है। पिछले कुछ महीनों से चीन की अर्थव्यवस्था में उथल पुथल का माहौल बना हुआ है।

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दरअसल, चीन मंदी की चपेट में है। इससे निकलने का वह हरसंभव प्रयास कर रहा है, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। गत दिनों उसने अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अपनी मुद्रा युआन का अवमूल्यन किया था। उसे उम्मीद थी कि उसके इस कदम से निर्यात बढ़ेगा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सुस्ती खत्म हो जाएगी। दरअसल, चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है। वैश्विक मंदी के कारण दुनिया में मांग कम होने के चलते उसके उत्पादन में गिरावट आई है। गत शुक्रवार को चीन में मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़े जारी हुए जो कि उम्मीद से बहुत कम थे, उसके बाद चीनी बाजार में नौ फीसदी की भारी गिरावट दर्ज हुई।

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हालांकि उसने बाजार को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं, उसके बावजूद हालात नहीं संभल रहे हैं। उधर शुक्रवार को ही चीन के प्रभाव से अमेरिकी बाजार ने भी एक दिन की ऐतिहासिक गिरावट दर्जकी, जो कि 2011 के बाद सबसे निचला स्तर था। इस तरह दुनिया की दो बड़े बाजारों में आई गिरावट के बाद विदेशी निवेशकों में डर बैठ गया है जिसकी वजह से वे भारत सहित तमाम विकासशील देशों से पैसा निकाल रहे हैं। वित्तमंत्री अरुण जेटली और रिर्जव बैंक के गवर्नर रघुराम राजन की मानें तो भारतीय अर्थव्यवस्था दूसरे देशों की तुलना में मजबूत है लिहाजा इस वैश्विक उतार चढ़ाव का इस पर अस्थाईअसर होगा। आंकड़े भी इसके गवाही दे रहे हैं। यहां राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा नियंत्रण में हैं। भारत के पास विदेशी मुद्रा का बड़ा भंडार है। कच्चे तेल की कीमत छह साल के सबसे निचले स्तर पर है। अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 40 डॉलर प्रति बैरल है। महंगाई भी नियंत्रण में है। वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आकलन है कि वैश्विक मंदी के बावजूद यह दुनिया में सबसे तेजी से विकास कर रहा है। ऐसे में इस गिरावट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ने की उम्मीद कम है।

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