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फिर हिंसा की आग में पूर्वोत्तर राज्य असम

भारत सरकार ने इस ग्रुप को आतंकी गुट की श्रेणी में डाल रखा है।

फिर हिंसा की आग में पूर्वोत्तर राज्य असम

पूर्वोत्तर राज्य असम एक बार फिर हिंसा की आग में जल रहा है। मंगलवार को नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट आॅफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के बोडो उग्रवादियों ने सोनितपुर और कोकराझार जिले में पचास से ज्यादा आदिवासियों को गोली मार दी थी, उसके बाद गैर बोडो जनजाति भी हिंसक हो गए हैं। अब क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कार्फ्यू लगाने सहित सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को भेजा गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि असम में हालात जल्द ही सामान्य हो जाएंगे। एनडीएफबी एक ऐसा संगठन है जिसका मकसद है असम से बोडो बहुल इलाके को अलग कर एक स्वतंत्र और संप्रभु बोडोलैंड देश की स्थापना।

भारत सरकार ने इस ग्रुप को आतंकी गुट की श्रेणी में डाल रखा है। लगभग 28 साल पहले 1986 में बना ये संगठन सामूहिक नरसंहार के लिए कुख्यात है और ऐसे हमलों में वो अब तक हजारों लोगों की जान ले चुका है। आज एनडीएफबी संगठन अरुणाचल प्रदेश और भूटान सीमा के पास अधिक सक्रिय है। यहीं से वह अपनी गतिविधि चलाता है। बोडो उग्रवादियों द्वारा बच्चों, महिलाओं और निर्दोष पुरुषों को मारना मानवता के खिलाफ अपराध है। बोडो उग्रवादियों ने बेहद कमजोर, गरीब, मासूम आदिवासियों के साथ ऐसी बर्बरता दिखाकर हैवानियत की सारी हदें लांघ दी है। विशेषज्ञों का मानना हैकि इस हत्या के पीछे कोई आर्थिक कारण नहीं है बल्कि वह आतंक फैलाना चाहता है। बोडो उग्रवादी असम में काफी समय से अलग राज्य की मांग, अलग पहचान के मुद्दे और जातीय मुद्दों पर हिंसा भड़काते रहे हैं। उनकी बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर भी एक बड़ी शिकायत रही है। उनका आरोप रहा है कि अवैध घुसपैठ के कारण स्थानीय बोडो समुदाय के लोगों के रोजगार व धर्म-संस्कृति पर संकट आ गया है और वे अपने ही इलाके में अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं।

हालांकि इस बिना पर उग्रवादी गतिविधियों को अंजाम देने को कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है। वह भारत जैसे संप्रभु राष्ट्र को तोड़ना चाहता है। बोडो उग्रवादियों के द्वारा अलग देश बनाने की मांग करना भारत केखिलाफ एक साजिश है। ऐसे में उनके खिलाफ भारत सरकार जरूरी कार्रवाई करती है तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है, परंतु बोडो उग्रवादी इन सैन्य कार्रवाइयों से परेशान हैं। वे इसे रोकना चाहते हैं। सरकार पर दबाव बनाने के लिए कुछ ही दिनों पहले एनडीएफबी के सोंगबिजित गुट ने धमकी दी थी कि यदि भारत सरकार उनके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर रोक नहीं लगाती है तो वे जवाबी हमला करेंगे।

यह गुट भारत सरकार के साथ किसी भी तरह की शांति वार्ता के खिलाफ रहा है। अब हिंसक वारदातों को अंजाम देना उसकी नियति बन गई है। दरअसल, वह बंदूक के बल पर अपनी बातों को मनवाना चाहता है। सभी तर्कों को किनारे रख कर यह संगठन जिस तरह से किसी को भी गोली मार देने की नीति पर चल रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उसे याद रखना चाहिए कि ऐसे उग्रवादी गिरोह को समाज ज्यादा दिनों तक नहीं झेल सकता है। अगर अभी भी सरकारें इस संगठन पर काबू नहीं कर पार्इं, तो हालात और गंभीर होंगे।

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